London News: ब्रिटेन की राजधानी लंदन में शनिवार को भारी बवाल देखने को मिला। इमिग्रेशन और मुस्लिम समुदाय के विरोध में निकली एक रैली ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान हिंसा भड़क उठी और पुलिस के साथ जमकर झड़पें हुईं। हालात इतने बिगड़ गए कि 26 पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
किसने भड़काई लंदन की आग?
इस विशाल रैली का आयोजन दक्षिणपंथी नेता टॉमी रॉबिंसन ने किया था। उनके बुलावे पर एक लाख से ज्यादा लोग सेंट्रल लंदन की सड़कों पर उतर आए। आयोजकों ने इसे ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का नाम दिया। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। भीड़ ने इमिग्रेशन और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथों में नफरत भरे पोस्टर और जुबान पर उकसाऊ भाषण थे। इसने पूरे माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
सड़कों पर हिंसा का नंगा नाच
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर भीड़ बेकाबू हो गई। उपद्रवियों ने पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ दिए। सुरक्षाबलों पर पथराव किया गया। पुलिस ने भीड़ को रोकने की पूरी कोशिश की। हालात संभालने के लिए अतिरिक्त फोर्स बुलानी पड़ी। कई इलाकों में ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। सार्वजनिक परिवहन को भी रोकना पड़ा। लंदन की सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।
नस्लवादी नारों से फैला डर
रैली में एक नारा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। प्रदर्शनकारी चिल्ला रहे थे- “जिनको हमने गुलाम बनाया था, वे हमें गुलाम बना रहे हैं।” इस नारे ने नस्लवादी सोच को खुलकर सामने रख दिया। इसे मुस्लिम विरोधी मानसिकता का बड़ा सबूत माना जा रहा है। इस तरह की नारेबाजी ने सामाजिक ढांचे पर गहरी चोट की है।
मुस्लिम समुदाय में भारी आक्रोश
ब्रिटेन में करीब 40 लाख मुसलमान रहते हैं। इस रैली ने उनके मन में डर बैठा दिया है। मुस्लिम संगठनों ने इसे नफरत फैलाने वाला कदम बताया है। मानवाधिकार समूहों ने सरकार से सख्त एक्शन की मांग की है। सोशल मीडिया पर ‘मुसलमानों को देश से बाहर निकालने’ जैसे ट्रेंड चल पड़े हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
सरकार ने दी सख्त चेतावनी
ब्रिटिश सरकार ने हिंसा की कड़ी निंदा की है। गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। शांतिपूर्ण प्रदर्शन सबका अधिकार है, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारियां सुरक्षा के लिए जरूरी थीं। मामले की जांच तेजी से चल रही है। दुनिया भर के 57 इस्लामिक देशों ने भी इस घटना पर नजर बनाए रखी है। कई देशों ने इसे इस्लामोफोबिया का गंभीर मामला बताया है।
