जब अंग्रेजी नही आती तो अंग्रेजी में नोटिस क्यों लिखवाया; दरोगा से हाई कोर्ट का सवाल

0
52

अंग्रेजी आने न आने के भी अपने अलग-अलग नफा नुकसान हैं. इस बात को मध्य प्रदेश पुलिस के एक भुक्त भोगी दारोगा से बेहतर और कौन समझ सकता है. एक जांच में दारोगा ने कागजात (नोटिस) तो अंग्रेजी में किसी और से लिखवाकर-तैयार करा ली.

अंग्रेजी के मजमून से तैयार कानूनी कागजातों-दस्तावेजों के ऊपर हस्ताक्षर दारोगा ने खुद के कर दिए. बस यहीं अंग्रेजी और हिंदी के ज्ञान की खिचड़ी ने ‘दारागो जी’ को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बुरी तरह से फंसवा दिया! फंसवा ही नहीं दिया दारोगा की नौकरी तक पर आन पड़ी. जाने-अनजाने हुई दारोगा की इस गलती को जब हाईकोर्ट ने पकड़ा तो, मध्य प्रदेश पुलिस के आला-अफसरान और कानूनविद भी हैरान रह गए.

दरअसल यह मामला सेक्शन-50 की शिकायत से संबंधित था. जिसमें दारोगा ने अंग्रेजी के जानकार अपने किसी परिचित महानुभाव की मदद ले ली. दारोगा ने अंग्रेजी जानने वाले को जैसा कुछ हिंदी में समझाया, उसी के मुताबिक उसने अंग्रेजी में मैटर ड्राफ्ट कर दिया. जिन कागजों पर दारोगा ने यह मैटर ड्राफ्ट करवाया, उनके ऊपर दारोगा जी ने बस दस्तखत अपने कर दिए. कानूनी-पुलिसिया दस्तावेजों पर दस्तखत करने से पहले या तो दारोगा जी ने ऊपर लिखा वो मजमून लापरवाहीवश पढ़ा ही नहीं जिसके नीचे वे, अपने हस्ताक्षर कर रहे थे? या फिर दारोगा जी को अंग्रेजी की समझ नहीं थी, जिसके चलते उन्होंने अंग्रेजी जानने वाले परिचित द्वारा लिखे गए मजमून पर आंख मूंदकर हस्ताक्षर कर दिए. यह मुकदमा मादक पदार्थ बेचने संबंधी धाराओं से संबंधित था.

बात दारोगा के दस्तखतों तक नहीं रही

बात दारोगा द्वारा कानूनी दस्तावेजों पर सिर्फ दस्तखत करने भर तक ही सीमित नहीं रह गई. इन दस्तावेजों को दारोगा एक अदालत से दूसरी अदालत में भी दाखिल करता चला गया. दारोगा की लापरवाही और या फिर अंग्रेजी के कम ज्ञान की बात का भांडा तब फूटा जब, अंग्रेजी में तैयार दारोगा के हस्ताक्षरित दस्तावेज मध्य-प्रदेश हाईकोर्ट में तक में दाखिल कर डाले गए. हाईकोर्ट ने पूरे मामले को जब पकड़ा तो, दारोगा की हालत जो थी सो तो थी ही. यह दारोगा मध्य प्रदेश पुलिस के जिन आला-अफसरों के अधीन तैनात रहकर काम कर रहा था, उन्हें भी सफाई देना मुश्किल हो गया. क्योंकि, सीधे तौर पर तो गलती दारोगा कि थी. दारोगा की जल्दबाजी, न-समझी या कहिए लापरवाही के चलते मगर, हाईकोर्ट की नजर में बे-वजह ही चढ़ पुलिस अफसरान भी गए.

हाईकोर्ट जज ने ऐसे पकड़ा मामला

घटनाक्रम के मुताबिक और जो बात हाईकोर्ट के अनुभवी जज विवेक अग्रवाल ने पकड़ी वो थी कि, एक जगह वाक्य लिखा हुआ था, “आप अपने बैग की तलाशी जो बुलेरो गाड़ी में रखा है.” साथ ही इसी के नीचे अंग्रेजी में लिखा मिला- आइ एम रेडी फॉर द बॉडी सर्चिंग.” इसी पर हाईकोर्ट ने दारोगा जी को उन्हीं के दारोगा द्वारा अदालत में दाखिल एक ही दस्तावेज के ऊपर दो-दो बातें लिखी होने के चलते घेर लिया. यह कहते हुए कि आखिर पुलिस ने तलाशी बुलेरो गाड़ी में रखे बैग की जब ले ली थी. पुलिस के दस्तावेजों के मुताबिक बैग बुलेरो गाड़ी से बरामद भी हो गया. तो फिर वह (पुलिस) और किसकी वॉडी की सर्च लेने के लिए तैयारी की बात, अपने दस्तावेजों में लिखकर हाईकोर्ट तक ले आई? हाईकोर्ट के कहने का मतलब था कि, पुलिस को जब बैग पहले ही बुलेरो कार से बरामद हो चुका था तो फिर उसे किसी की वॉडी की सर्च की जरुरत क्यों, कैसे और कब पड़ गई?

दारोगा ने सबकी मिट्टी पलीद कराई

हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल द्वारा एक साथ किए गए इन तीन-तीन सवालों के जाल में, एक दारोगा जी की जाने-अनजाने की गलती ने, खाकी वर्दी के काम करने के तौर-तरीकों पर ही सवालिया निशान लगा दिया! इस बारे में मुलजिम पक्ष के वकील का कहना था कि यह सब पुलिस द्वारा, सही लिखा-पढ़ी न किए जाने के चलते हुआ है. मुलजिम पक्ष के वकील की बात को काटते हुए पुलिस पक्ष के वकील ने कहा कि, अंग्रेजी में मैटर तो ड्राफ्ट मुलजिम पक्ष ने ही कराया था.

बस दारोगा जी के लिए यह और भी गजब हो गया. हाईकोर्ट ने पुलिस के वकील को यह कहकर निरुत्तर कर दिया कि, क्या आप (दारागो-पुलिस) यह कहना चाहते हैं कि आपको (दारोगा को) अंग्रेजी नहीं आती है? पुलिस की तरफ से पेश वकील को हड़काने से हाईकोर्ट यहीं नहीं रुकी. हाईकोर्ट ने कहा कि, आप लिखित में हमें दे दीजिए कि इनको (दारोगा) अंग्रेजी नहीं आती है. तो फिर हम (हाईकोर्ट) उसी तरह से इनके खिलाफ (दारोगा) आगे की कार्यवाही के लिए इनके महकमे (मध्य प्रदेश पुलिस) को लिख दें कि, दारोगा के खिलाफ कार्यवाही की जाए इन्हें (दारोगा) अंग्रेजी नहीं आती है.

Leave a Reply