Science News: इंसानी शरीर में छेदों की संख्या सुनने में एक साधारण सवाल लगता है। लेकिन यह प्रश्न गणित और जीव विज्ञान के बीच एक रोचक बहस खड़ी कर देता है। अधिकांश लोग मुंह, नाक और कान जैसे दिखाई देने वाले छिद्रों को गिनने लगते हैं। पर असली उत्तर इस पर निर्भर करता है कि आप ‘छेद’ की परिभाषा क्या मानते हैं।
गणित की शाखा टोपोलॉजी के अनुसार छेद की एक सख्त परिभाषा होती है। इसके मुताबिक केवल वही रास्ता छेद माना जाता है जो शरीर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक बिना रुकावट जाता हो। इस दृष्टिकोण से शरीर के कई खुले हिस्से छेद नहीं माने जाते।
टोपोलॉजी क्या कहती है
टोपोलॉजी गणित की वह शाखा है जो आकृतियों और स्थानों के संबंधों का अध्ययन करती है। इसमें छेद की परिभाषा बहुत विशिष्ट होती है। डोनट को इसका सबसे आसान उदाहरण माना जाता है जिसमें एक ही छेद होता है।
इस परिभाषा के अनुसार त्वचा के रोम छिद्र छेद नहीं हैं। कान भी छेद नहीं माने जाते क्योंकि वे अंदर बंद जेब की तरह होते हैं। यह दृष्टिकोण शारीरिक संरचना को एक नए तरीके से देखना सिखाता है।
शरीर रचना विज्ञान बनाम गणित
शरीर रचना विज्ञान के अनुसार शरीर में कई खुले हिस्से होते हैं। इनमें मुंह, नथुने और अन्य अंग शामिल हैं। लेकिन गणितज्ञ केवल उन्हीं रास्तों को छेद मानते हैं जो पूरी तरह से खुले हों।
पाचन तंत्र मुंह से गुदा तक एक सतत नली बनाता है। टोपोलॉजी के अनुसार यह एक ही छेद माना जाता है। नाक के दोनों नथुने मिलकर एक दूसरा छेद बनाते हैं। यह गणना हमारी सामान्य समझ से अलग है।
पुरुष शरीर में सात छेद
गणितीय गणना के अनुसार पुरुष शरीर में सात छेद होते हैं। पाचन मार्ग पहला छेद माना जाता है। नासिका मार्ग दूसरा छेद बनाता है। मूत्रमार्ग तीसरा छेद है।
आंसू नलिकाएं चौथा और पांचवा छेद बनाती हैं। कान की यूस्टेशियन ट्यूब छठा छेद है। शुक्राणु वाहिकाएं सातवां छेद मानी जाती हैं। यह गणना सामान्य धारणा से बिल्कुल भिन्न है।
महिला शरीर में आठ छेद
महिला शरीर में एक अतिरिक्त छेद होता है। यह योनि मार्ग के कारण होता है। यह मार्ग गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब तक जुड़ा रहता है।
इस कारण महिला शरीर में आठ छेद माने जाते हैं। यह अंतर जैविक संरचना के कारण होता है। गणितीय दृष्टिकोण यह भेद स्पष्ट रूप से दिखाता है।
क्या नहीं माने जाते छेद
त्वचा के लाखों रोम छिद्र छेद नहीं माने जाते। ये शरीर के आर पार नहीं जाते हैं। कान का पर्दा इसे बंद संरचना बनाता है।
आंखों की पुतलियां भी छेद नहीं हैं। मलाशय का अंतिम भाग बंद होता है। इन सभी का टोपोलॉजी में अलग वर्गीकरण होता है।
विज्ञान में परिभाषाओं का महत्व
यह विषय दिखाता है कि परिभाषाएं हमारी समझ को कैसे बदल देती हैं। एक ही शरीर अलग अलग विज्ञानों में अलग तरह से देखा जाता है। जीव विज्ञानी, चिकित्सक और गणितज्ञ का दृष्टिकोण भिन्न होता है।
रोजमर्रा की साधारण लगने वाली बातें गहरा वैज्ञानिक अर्थ रख सकती हैं। विज्ञान अक्सर इन्हीं अलग दृष्टिकोणों के बीच स्थित होता है। नई परिभाषाएं नई समझ विकसित करने में सहायक होती हैं।
शैक्षिक महत्व
यह प्रश्न शिक्षा में बहुविषयक दृष्टिकोण का महत्व दिखाता है। गणित और जीव विज्ञान का संयोग रोचक निष्कर्ष देता है। टोपोलॉजी जैसी गणितीय शाखाएं व्यावहारिक अनुप्रयोग रखती हैं।
विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के बीच संबंध समझने में मदद मिलती है। वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए ऐसे प्रश्न उपयोगी होते हैं। पाठ्यक्रम में ऐसे अंतःविषयक तत्वों को शामिल किया जा सकता है।
सामान्य धारणाओं का विश्लेषण
हम अक्सर सतही तौर पर चीजों को देखते हैं। गहराई से विश्लेषण करने पर नई जानकारी मिलती है। विज्ञान हमें सूक्ष्म अध्ययन के लिए प्रेरित करता है।
साधारण प्रश्नों के असाधारण उत्तर हो सकते हैं। जिज्ञासा वैज्ञानिक खोज की मूल प्रेरणा है। नए दृष्टिकोण स्थापित धारणाओं को चुनौती देते हैं।
यह विषय हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम चीजों को कैसे परिभाषित करते हैं। परिभाषाओं में बदलाव से हमारी समझ भी बदल जाती है। विज्ञान की यही सुंदरता है कि यह लगातार हमारी सोच को नई दिशा देता रहता है।
