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Land Record: अब घर बैठे निकालें जमीन के कागज! 19 राज्यों में बड़ा बदलाव, बैंकों के चक्कर भी खत्म

National News: अब आपको जमीन के कागज लेने के लिए तहसील या पटवारी के चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार ने लैंड रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। देश के 19 राज्यों के नागरिक अब घर बैठे अपनी जमीन के कागज डिजिटल फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये ऑनलाइन कागज कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होंगे। इसके अलावा, अब लोन लेना भी काफी आसान हो गया है। देश के 406 जिलों में बैंक अब ऑनलाइन ही जमीन की जांच कर सकेंगे।

97% गांवों का डेटा हुआ ऑनलाइन

भूमि संसाधन विभाग ने लैंड रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 97 प्रतिशत से ज्यादा गांवों में जमीन का रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज हो चुका है। इतना ही नहीं, 97 फीसदी जमीनों के नक्शे भी डिजिटल कर दिए गए हैं। इसका सीधा फायदा आम जनता को मिल रहा है। अब जमीन से जुड़े छोटे-छोटे कामों के लिए लंबी लाइनों में लगने की जरूरत खत्म हो गई है।

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जमीन का ‘आधार कार्ड’ जारी

केंद्र सरकार ने जमीन की पहचान के लिए एक खास व्यवस्था शुरू की है। इसे यूएलपीआईएन (ULPIN) नाम दिया गया है। यह 14 अंकों का एक यूनिक नंबर होता है, जिसे जमीन का ‘आधार कार्ड’ कहा जा रहा है। नवंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से ज्यादा जमीनों को यह नंबर दिया जा चुका है। सरकार ने लैंड रिकॉर्ड के काम को पूरा करने के लिए राज्यों को 1,050 करोड़ रुपये की सहायता भी मंजूर की है।

शहरों में ड्रोन से हो रहा सर्वे

शहरों में जमीन के विवाद खत्म करने के लिए सरकार ने ‘नक्शा’ (NAKSHA) योजना चलाई है। इसके तहत हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से हवाई सर्वे किया जा रहा है। अभी देश के 157 शहरी निकायों में यह काम चल रहा है। इनमें से 116 जगहों पर सर्वे पूरा हो चुका है। सरकार का दावा है कि 21 शहरों में जमीनी स्तर पर जांच का काम पूरी तरह खत्म हो गया है। इससे शहरी इलाकों में लैंड रिकॉर्ड ज्यादा सटीक हो जाएंगे।

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रजिस्ट्री होते ही अपडेट होगा रिकॉर्ड

सरकार ने ‘राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली’ (NGDRS) लागू की है। यह सिस्टम पंजाब, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश समेत 17 राज्यों में शुरू हो चुका है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि रजिस्ट्री होते ही लैंड रिकॉर्ड अपने आप अपडेट हो जाता है। करीब 88 फीसदी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस अब ऑनलाइन जुड़ चुके हैं। इससे जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आई है और धोखाधड़ी की गुंजाइश कम हो गई है।

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