New Delhi News: भारत अब रक्षा क्षेत्र में किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) को और भी घातक बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में भारत अपने पुराने मित्र इजरायल के साथ एक ऐतिहासिक डिफेंस डील करने जा रहा है। यह डील 78,217 करोड़ रुपये की है। इसके तहत भारत को ऐसी मिसाइलें मिलेंगी कि घर बैठे बटन दबाते ही लाहौर जैसे शहरों में छिपे दुश्मनों का सफाया किया जा सकेगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बदली परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
चीन और पाकिस्तान की अब खैर नहीं
भारतीय सीमाओं पर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। एक तरफ चीन अपनी उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम के साथ खड़ा है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान जीपीएस जैमिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ये खतरे खुलकर सामने आए थे। भारतीय वायुसेना को इन चुनौतियों से निपटने के लिए ही इजरायल से ये हथियार मिल रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली परिषद ने इस खरीद को हरी झंडी दे दी है।
इजरायल से आ रहे हैं ये तीन ‘ब्रह्मास्त्र’
इस डील में तीन मुख्य हथियार शामिल हैं- रैम्पेज, एयर लोरा और आइस ब्रेकर। ये तीनों मिलकर भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे। मिसाइल का नाम खूबी और ताकत रैम्पेज (Rampage) यह 570 किलो की मिसाइल है। यह दुश्मन के बंकर और कंट्रोल टावर को ध्वस्त करती है। इसमें एंटी-जैमिंग तकनीक लगी है। एयर लोरा (Air LORA) यह बैलिस्टिक मिसाइल मैक-5 की रफ्तार (ध्वनि से 5 गुना तेज) से उड़ती है। इसकी रेंज 430 किमी तक है। आइस ब्रेकर (Ice Breaker) यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस है। यह कम ऊंचाई पर उड़कर रडार को चकमा देती है।
रैम्पेज: दुश्मन के घर में घुसकर वार
रैम्पेज मिसाइल पहले से ही भारत के पास मौजूद है। अब इसकी संख्या बढ़ाई जा रही है। इसे सुखोई-30 और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है। यह जीपीएस जैमिंग के माहौल में भी अपने लक्ष्य को नहीं भटकती। दुश्मन के एयरबेस और लॉजिस्टिक ठिकानों को बर्बाद करने में यह माहिर है।
एयर लोरा: गति ऐसी कि रडार भी न पकड़ पाए
एयर लोरा मिसाइल जमीन से दागी जाने वाली लोरा मिसाइल का हवाई संस्करण है। भारतीय वायुसेना के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। यह लगभग 1600 किलो वजनी है। यह 400 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को भी पलक झपकते ही खत्म कर सकती है। इसकी रफ़्तार इतनी तेज है कि दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम इसे रोक नहीं पाता। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इजरायली कंपनी मिलकर बना रहे हैं।
आइस ब्रेकर: छिपकर हमला करने वाला शिकारी
आइस ब्रेकर मिसाइल को आज के इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन 400 किलो से कम है। यह 300 किलोमीटर तक मार कर सकती है। इसकी खासियत यह है कि यह जमीन से बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती है। इस वजह से यह दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आती। अगर जीपीएस काम न करे, तो भी यह अपने सेंसर से लक्ष्य को ढूंढ लेती है।
भारत में ही बनेंगी ये मिसाइलें
इस डील की सबसे अच्छी बात ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ है। साल 2025 के अंत तक पूरी तकनीक भारत को मिल जाएगी। इसके बाद भारतीय वायुसेना के लिए इन मिसाइलों का निर्माण भारत में ही होगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और BEL मिलकर इसे बनाएंगे। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बड़ी मजबूती मिलेगी। उम्मीद है कि 2026 तक सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) इस पर अंतिम मुहर लगा देगी।

