राज्य सरकार की नई गाइडलाइन को भले ही कठोर नियम की परिभाषा दी जा रही हों, लेकिन गैर जरूरी सेवाओं को बंद करने का परिणाम लॉकडाउन जैसा ही नजर आ रहा है। पिछले एक सप्ताह से उत्तर भारत जाने वाली ट्रेनों की बुकिंग लगातार regret बता रही है। लॉकडाउन जैसी स्थिति, प्रदेश में पंचायत स्तर के चुनाव और छुट्टियों या शादियों का सीजन ट्रेनों में भीड़ बढ़ा रहा है।

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार के अनुसार, केवल आरक्षित टिकट वालों को ही स्टेशन परिसर में आने और ट्रेनों में यात्रा की अनुमति है। पहले जो लोग सामान्य श्रेणी से यात्रा करते थे, अब उन्हें सेकंड सिटिंग श्रेणी में सीमित टिकट दी जारी है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर भीड़ न हों, इसके लिए प्‍लेटफॉर्म टिकट की कीमत 50 रुपये कर दी गई है।

बढ़ाई जा रही हैं ट्रेनें
रेलवे की ओर से पिछले 15 दिनों से लगातार भीड़ कम करने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। हालांकि, कोरोना से पहले जितनी ट्रेनें चलती थीं, उसके मुकाबले अभी आधी ट्रेनें चल रही हैं।

मजदूर फिर घर लौटने लगे
कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन के आसार को देखते हुए वसई इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले मजदूर अब अपने-अपने गांव की ओर पलायन करने लगे हैं। मजदूरों में डर पैदा हो गया है कि कहीं 2020 जैसे हालात न हो जाएं, इसलिए गांव जाकर सुरक्षित रहेंगे।

मजदूरों के पलायन से कंपनी मालिकों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। उन्हें डर है कि अगर मजदूर चले गए, तो कंपनी को ताला लगाना पड़ सकता है। स्टील व्यापारी एक बार फिर खुद को मंदी में फंसता देख रहे हैं। वसई में लगभग 4,000 से अधिक कंपनियां हैं। यहां 40 हजार से अधिक मजदूर काम करते हैं।

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