जाने क्या है सीआरपीसी की धारा 80

RIGHT NEWS INDIA: दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) में इस तरह की कानूनी प्रक्रियाओं (Legal procedures) को परिभाषित (Defined) किया गया है, जिनका इस्तेमाल अदालती कार्यवाही (Court proceedings) और पुलिस प्रणाली में किया जाता है.

इसी तरह से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 80 (Section 80) वारंटी शख्स की गिरफ्तारी (Arresting) होने की प्रक्रिया के संबंध में प्रावधान (Provision) करती है. चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 80 इस बारे में क्या बताती है?

सीआरपीसी की धारा 80 (CrPC Section 80)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 80 (Section 80) के अनुसार, जब गिरफ्तारी के वारंट (Warrant of arrest) का निष्पादन (Execution) उस जिले से बाहर किया जाता है, जिसमें वह जारी किया गया था. तब गिरफ्तार (Arrest) किए गए व्यक्ति को, उस दशा के सिवाय जिसमें वह न्यायालय (Court) जिसने वह वारंट (Warrant) जारी किया गिरफ्तारी के स्थान से तीस किलोमीटर के अंदर है या उस कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive magistrate) या जिला पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) या पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) से जिसकी अधिकारिता (Jurisdiction) की स्थानीय सीमाओं के अंदर गिरफ्तारी की गई थी, अधिक निकट है, या धारा 71 के अधीन प्रतिभूति ले ली गई है, ऐसे मजिस्ट्रेट (Magistrate) या जिला अधीक्षक अधीक्षक या आयुक्त के समक्ष ले जाया जाएगा.

क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में ‘दंड प्रक्रिया संहिता’ कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

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