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केजीएमयू विवाद: यौन शोषण, धर्मांतरण के आरोपों और प्रशासन की चुप्पी पर भड़कीं महिला आयोग

Uttar Pradesh News: केजीएमयू में यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के आरोपों वाले मामले में नया मोड़ आया है। विशाखा कमेटी ने जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन को दोषी पाया है। महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने आज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केजीएमयू प्रशासन आरोपी के संपर्क में था और पीड़िता की सुनवाई नहीं हुई।

अपर्णा यादव ने बताया कि वह आज वाइस चांसलर से मिलने केजीएमयू पहुंची थीं। लेकिन दस मिनट तक इंतजार करने के बाद भी कोई उनसे मिलने नहीं आया। उन्होंने केजीएमयू प्रशासन के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि महिला आयोग को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

पीड़ित महिला डॉक्टर ने अपर्णा यादव को बताया कि उन्होंने विभागाध्यक्ष को शिकायत की थी। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद ही वह महिला आयोग के पास गई थीं। आरोप है कि आरोपी डॉक्टर रमीज उद्दीन प्रशासन के संपर्क में था। शिकायत के दो दिन बाद वह केजीएमयू से भाग गया।

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विशाखा कमेटी रिपोर्ट पर उठे सवाल

अपर्णायादव ने विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पीड़िता पर सीनियर डॉक्टरों ने दबाव डाला। उनसे पूछा गया कि वह महिला आयोग क्यों गईं। आरोप लगाया गया कि आरोपी को बचाने के लिए काम किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि गवाहों पर बयान बदलने का दबाव डाला जा रहा है। केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और धर्मांतरण के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन प्रशासन इस पर पूरी तरह खामोश है।

बिना लाइसेंस के चल रहा था ब्लड बैंक

अपर्णायादव ने एक और गंभीर खुलासा किया। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में दो साल से बिना लाइसेंस का ब्लड बैंक चल रहा था। प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। यह बात संस्थान की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।

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महिला आयोग की उपाध्यक्ष इस पूरे मामले में शुरू से सक्रिय रही हैं। पीड़िता सबसे पहले अपर्णा यादव से ही मिली थी। उन्होंने ही इस मामले को सार्वजनिक मंच पर उठाया था। उन्होंने त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए प्रेस कांफ्रेंस भी की थी।

केजीएमयू प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। विशाखा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना अभी बाकी है।

यह मामला संस्थानों में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में ऐसे गंभीर आरोप चिंता का विषय हैं। प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब न्यायिक प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार है।

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