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KCCB लोन घोटाला: बैंक हेडक्वार्टर में रेड, इधर SP ने नाप दिया SHO; क्या है 12 करोड़ का पूरा खेल?

Himachal News: कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (KCCB) के बहुचर्चित होटल लोन घोटाले में एक बड़ा और नाटकीय मोड़ आया है। मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे ऊना के थाना सदर एसएचओ को अचानक लाइन हाजिर कर दिया गया है। एसपी ऊना ने कार्रवाई करते हुए उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा है। दूसरी तरफ, पुलिस की एक विशेष टीम ने धर्मशाला स्थित बैंक मुख्यालय पर छापा मारा है। टीम ने लोन से जुड़ी कई अहम फाइलें और दस्तावेज जब्त किए हैं।

जांच अधिकारी पर ही क्यों गिरी गाज?

ऊना के पुलिस अधीक्षक अमित यादव ने कड़ा कदम उठाते हुए सदर थाना प्रभारी गौरव भारद्वाज को लाइन हाजिर किया है। विभाग ने जांच से जुड़े कुछ खास बिंदुओं पर उनसे जवाब तलब किया है। अभी यह साफ नहीं है कि यह मामला शक्तियों के दुरुपयोग का है या जांच में लापरवाही का।

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसएचओ का स्पष्टीकरण आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। गौरतलब है कि इस हाई-प्रोफाइल केस में बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार समेत आठ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है।

बैंक मुख्यालय में पुलिस की दबिश

एक तरफ जांच अधिकारी पर कार्रवाई हुई, तो दूसरी तरफ पुलिस एक्शन मोड में नजर आई। थाना सदर ऊना की एक विशेष टीम शुक्रवार को धर्मशाला पहुंची। टीम ने केसीसीबी (KCCB) मुख्यालय में दबिश दी। पुलिस ने लोन केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। यह दस्तावेज जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

12 करोड़ का लोन और गायब पन्ने

यह पूरा मामला मंडी निवासी होटल कारोबारी युद्ध चंद बैंस की शिकायत पर दर्ज हुआ है। एफआईआर के मुताबिक, उन्होंने साल 2016 में होटल प्रोजेक्ट के लिए 12 करोड़ रुपये का टर्म लोन पास करवाया था। इसके बदले उन्होंने अपनी दो होटल प्रॉपर्टी बैंक के पास गिरवी रखी थीं।

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आरोप है कि लोन पास होने के बाद भी बैंक ने समय पर पूरी रकम जारी नहीं की। इससे प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता का दावा है कि कोविड-19 के दौरान आरबीआई की राहत (मोरेटोरियम) के बावजूद 2021 में उनके लोन को गलत तरीके से एनपीए (NPA) घोषित कर दिया गया। आरटीआई से हुए खुलासे में पता चला कि लोन फाइल से रिजर्व प्राइस और वैल्यूएशन से जुड़ी अहम नोटिंग्स गायब हैं।

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