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कसौली रेप केस: हरियाणा BJP प्रमुख मोहन लाल बडोली और गायक रॉकी मित्तल को पुलिस ने दी क्लीन चिट

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कसौली की अदालत ने हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बडोली और गायक रॉकी मित्तल के खिलाफ चले सामूहिक दुष्कर्म मामले की पुलिस क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। पुलिस ने सबूतों के अभाव में दोनों को क्लीन चिट दी थी। मामला एक होटल में जुलाई 2023 की कथित घटना से जुड़ा था, जिसकी शिकायत दिसंबर 2024 में दर्ज हुई थी।

अदालत ने पुलिस की इस रिपोर्ट को गुरुवार को मंजूरी दे दी। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच की गई। पुलिस ने कहा कि आरोपों की पुष्टि करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले। इस आधार पर उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मामला बंद करने की सिफारिश की।

महिला ने पुलिस में आरोप लगाया था कि जुलाई 2023 में कसौली के एक होटल में दोनों आरोपियों ने उसे शराब पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। हालांकि, घटना के करीब डेढ़ साल बाद यह शिकायत दर्ज कराई गई। इस देरी ने भी जांच में चुनौतियां पैदा कीं।

शिकायतकर्ता अदालत में पेश नहीं हुई

मामलेमें एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता अदालत में पेश नहीं हुई। अदालती कार्यवाही के दौरान उसकी अनुपस्थिति ने मामले को और कमजोर किया। पुलिस भी सबूत जुटाने में नाकाम रही। इसके बाद ही क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई।

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पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आरोप लगाने वाली महिला के बयानों में विसंगतियां थीं। घटनास्थल से कोई ठोस फोरेंसिक सबूत भी नहीं बरामद हुए। होटल के सीसीटीवी फुटेज या अन्य सबूतों से आरोपियों को बरी करने का फैसला किया गया।

Uttar Pradesh News: इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने आठ साल के एक बच्चे की हत्या के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन नाबालिग भी शामिल हैं। बच्चे का शव बुधवार को एक गन्ने के खेत से मिला था।

मुजफ्फरनगर में बच्चे की क्रूर हत्या

एसएसपीसंजय कुमार ने बताया कि मुख्य आरोपी 19 वर्षीय अजय है। तीन अन्य नाबालिग लड़कों को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। उन्होंने हत्या का विवरण भी बयां किया है।

जांच के मुताबिक, आरोपियों ने बच्चे को बिस्किट देने के बहाने जंगल में ले गए। वहां उन्होंने बच्चे का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। बच्चे के विरोध करने पर वे सफल नहीं हो पाए। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने बच्चे का गला घोंटकर हत्या कर दी।

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इसके बाद आरोपियों ने शव को गन्ने के खेत में छुपा दिया। पुलिस को शक हुआ तो आरोपियों से पूछताछ की गई। पूछताछ में ही उन्होंने हत्या कबूल कर ली। पुलिस ने आरोपियों के बयान के आधार पर शव बरामद किया।

दोनों मामलों में जांच की भूमिका

कसौलीऔर मुजफ्फरनगर के मामले दो अलग तरह के हैं। एक में सबूतों के अभाव में आरोपी बरी हुए। दूसरे में त्वरित जांच और स्वीकारोक्ति से आरोपी पकड़े गए। दोनों ही मामले भारतीय कानून व्यवस्था की चुनौतियों को दर्शाते हैं।

कसौली मामले में देरी से शिकायत दर्ज होना एक बड़ा मोड़ था। पुलिस के लिए पुराने मामले में सबूत जुटाना मुश्किल होता है। वहीं, मुजफ्फरनगर मामले में पुलिस ने शीघ्र कार्रवाई की और आरोपियों को पकड़ा।

दोनों घटनाएं गंभीर आपराधिक मामलों में जांच के महत्व को रेखांकित करती हैं। कसौली मामला अदालत में सबूतों के महत्व को दिखाता है। मुजफ्फरनगर मामला पुलिस की जांच क्षमता का उदाहरण है। दोनों ही न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

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