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करुर भगदड़: CBI की गिरफ्त में जोसेफ विजय, पूछताछ शुरू, ये हैं अहम सवाल

Tamil Nadu News: करुर भगदड़ मामले में अभिनेता और टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय पर सीबीआई ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार दोपहर दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में उनसे पूछताछ हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह जांच एजेंसी ने संभाली है। इस दुखद घटना में अनुमान से कहीं अधिक भीड़ जमा हो गई थी।

पूछताछ के दौरान विजय से कार्यक्रम स्थल पर उनकी देरी पर सवाल किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि विजय के आने में लगभग सात घंटे की देरी हुई थी। इस लंबे इंतजार ने लोगों का सब्र तोड़ दिया था। सीबीआई जानना चाहती है कि इतनी बड़ी भीड़ इकट्ठा होने पर क्या कदम उठाए गए।

कार्यक्रम के बुनियादी इंतजामों पर भी सवाल उठे हैं। एजेंसी इस आयोजन की अनुमति और सुरक्षा योजना की जांच कर रही है। विजय से पूछा जा रहा है कि क्या संभावित खतरे का आकलन किया गया था। पानी और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी जांच का हिस्सा है।

विजय के काफिले के रास्ते और पुलिस समन्वय पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सीबीआई जानना चाहती है कि भारी भीड़ के बीच से उनका काफिला कैसे निकला। इसके अलावा हादसे की सटीक सूचना मिलने का समय भी एक अहम पहलू है। यह पूछताछ कई घंटों तक चल सकती है।

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सीबीआई ने इस मामले में पहले से काफी तैयारी की है। एजेंसी ने तमिलनाडु पुलिस के सुरक्षा कर्मियों से भी बातचीत की थी। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। अब इन सबूतों के आधार पर विजय से सीधे सवाल किए जा रहे हैं।

इस घटना की जांच निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई को सौंपी गई थी। पिछले साल अक्टूबर में राज्य सरकार ने यह फैसला लिया था। इस कदम का उद्देश्य पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना है। सीबीआई की जांच से कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

भगदड़ की वजह से कई लोगों की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। यह घटना एक राजनीतिक रैली के दौरान हुई थी। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने अफरातफरी की स्थिति बताई थी। इस त्रासदी ने पूरे राज्य को दुखी कर दिया था।

भीड़ प्रबंधन पर सवाल

आयोजकों ने केवल दस हजार लोगों के आने का अनुमान लगाया था। लेकिन वास्तव में भीड़ की संख्या तीस हजार तक पहुंच गई थी। इस विशाल भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं दिखी। सुरक्षा बलों की संख्या भी अपर्याप्त बताई जा रही है।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में है। क्या उन्हें भीड़ बढ़ने की सूचना मिली थी। अगर मिली थी तो उन्होंने क्या कार्रवाई की। इन सभी पहलुओं पर सीबीआई विस्तार से जांच कर रही है। हर छोटी से छोटी जानकारी को परखा जा रहा है।

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कार्यक्रम स्थल की भौगोलिक स्थिति भी एक चुनौती थी। वहां निकास के रास्ते सीमित थे और भगदड़ की स्थिति में लोगों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचा। सीबीआई विशेषज्ञ टीम ने घटनास्थल का मुआयना भी किया है। उनकी रिपोर्ट भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जांच अधिकारी विजय को रैली की अनुमति से जुड़े दस्तावेज दिखा सकते हैं। साथ ही गवाहों के बयान भी उनके सामने रखे जा सकते हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य तथ्यों का स्पष्टीकरण प्राप्त करना है। एजेंसी चाहती है कि हर सवाल का सीधा जवाब मिले।

इस मामले में अब तक किसी पर आरोप तय नहीं किए गए हैं। सीबीआई सभी पक्षों के बयान लेने के बाद ही कोई नतीजा निकालेगी। इस प्रक्रिया में अभी कुछ और दिन लग सकते हैं। अगले चरण में एजेंसी और गहन जांच कर सकती है।

यह जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। पूरे आयोजन की योजना और क्रियान्वयन को परखा जा रहा है। इसमें विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदार लोग शामिल हो सकते हैं। सीबीआई की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आ पाएगी।

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