Karnataka News: कर्नाटक की राजनीति में ‘दलित मुख्यमंत्री’ के मुद्दे ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दलों द्वारा लगातार की जा रही इस मांग पर राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्ष के इस पैंतरे को केवल राजनीतिक स्टंट करार दिया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार स्थिर है और नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल ही नहीं उठता। इस बयान के बाद राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार के भीतर भी इस बयान के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
विपक्ष की मांग पर जी. परमेश्वर का पलटवार
गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें दूसरों के घर में झांकने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा सत्ता में थी, तब उन्हें दलित मुख्यमंत्री की याद क्यों नहीं आई? परमेश्वर के अनुसार, विपक्ष केवल दलित समुदाय को गुमराह करने के लिए ऐसी बयानबाजी कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री का चयन पार्टी आलाकमान और विधायकों की सहमति से होता है। फिलहाल कांग्रेस पार्टी एकजुट है और सरकार अपने वादों को पूरा करने में जुटी है।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर विराम
पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की खबरें गलियारों में तैर रही थीं। विपक्ष इन खबरों का फायदा उठाते हुए दलित चेहरे को आगे करने की मांग कर रहा था। जी. परमेश्वर के इस हालिया बयान ने उन सभी अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। उन्होंने साफ कहा कि आलाकमान ने नेतृत्व को लेकर कोई नया निर्देश नहीं दिया है। कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ मजबूती से खड़े हैं।
जातीय समीकरण और वोट बैंक की राजनीति
कर्नाटक की राजनीति में दलित समुदाय एक बड़ा और निर्णायक वोट बैंक माना जाता है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस समुदाय को साधने की हर संभव कोशिश करते रहते हैं। विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे को उठाकर कांग्रेस के भीतर दरार पैदा की जाए। वहीं, जी. परमेश्वर जैसे वरिष्ठ दलित नेता का यह बचाव सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे खुद पूर्व में उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और समुदाय के भीतर उनकी गहरी पकड़ है।
कांग्रेस की भविष्य की रणनीति
जी. परमेश्वर ने संकेत दिया कि पार्टी फिलहाल विकास कार्यों और पांच प्रमुख गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि वे रचनात्मक भूमिका निभाएं न कि सरकार गिराने के सपने देखें। आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अपने कैडर को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। नेतृत्व का मुद्दा फिलहाल पार्टी की प्राथमिकता सूची में नहीं है और वे सिद्धारमैया के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेंगे।
