कानपुर में इन दिनों साइबर ठग काफी सक्रिय है। यह अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं। साइबर ठग गूगल को हथियार बनाकर कभी कस्टमर केयर तो कभी बैंक अधिकारी बनकर लोगों के खातों से पैसे उड़ा रहे हैं। इसके अलावा कभी डेबिट और क्रेडिट कार्ड के नवीनीकरण के नाम पर तो कभी इंटरनेट मीडिया में महंगा सामान को सस्ते दामों में बेचने के नाम पर लोगों को झांसा देकर फंसा रहे हैं। कानपुर में ऐसी कई वारदातें हुई हैं। इन साइबर ठगों ने ट्रैफिक सिपाही, शिक्षक, एलआईसी एजेंट जैसे पढ़े-लिखे लोगों को भी अपना शिकार आसानी से बनाया है।

गौरतलब है कि साइबर ठगी की इन घटनाओं को देखते हुए रेंज में पहला साइबर थाना खोला गया था। यहां 14 महीने में 1006 शिकायतें आई और 371 मुकदमे दर्ज हुए। इस दौरान साइबर सेल की टीम ने ठगों के खाते फ्रीज कराने और कंपनियों में दिए ऑर्डर निरस्त कराकर पीड़ितों को 85 लाख रुपये की वापसी भी कराई है। एसपी साउथ दीपक भूकर ने बताया कि साइबर ठग गूगल केसरी लोगों को शिकार बना रहे हैं। कई नंबरों पर काम चल रहा है इस तरह की ठगी घटनाओं को अंजाम देने वाले गिरोह को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

इन मामलों में लोग रहे सावधान

1. ओएलएक्स जैसी साइट पर सामान की फोटो डालकर बेचने के नाम पर क्यूआरकोड स्कैन करा खाते से रकम निकाल लेते हैं।

2. इनाम में रकम या कार आदि जीतने का झांसा देकर खाते की जानकारी लेने के बाद रकम उड़ा देते हैं।

3. फेसबुक आइडी हैक करके फर्जी आइडी से लोगों को मैसेज कर मदद के नाम पर रुपयों की मांग करते हैं।

4. डेबिट-क्रेडिट कार्ड की केवाईसी अपडेट के नाम खातों का ब्योरा पूछते हैं और ओटीपी पूछकर ठगी करते हैं।

5. विभिन्न कंपनियों, बैंक के नाम पर फेक कस्टमर केयर नंबर गूगल पर डालते हैं। मदद मांगने वालों से खातों का ब्योरा पूछकर ठगी करते हैं।

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