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जज साहब का बड़ा बयान: ‘जो गुरु पर विश्वास नहीं करते वे मूर्ख हैं’, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस स्वामीनाथन की खरी-खरी

Tamil Nadu News: मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिकता पर एक बेहद प्रभावशाली बयान दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग गुरुओं की सत्ता और उनके मार्गदर्शन पर विश्वास नहीं करते, वे वास्तव में मूर्ख हैं। जस्टिस स्वामीनाथन अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति में गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए आधुनिक समाज को आईना दिखाया है। उनके इस बयान के बाद कानूनी और सामाजिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।

गुरु परंपरा भारतीय संस्कृति की नींव

जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा कि भारत की शक्ति उसके आध्यात्मिक ज्ञान और गुरुओं की शिक्षाओं में निहित है। उन्होंने प्राचीन काल से चली आ रही गुरु-शिष्य परंपरा का हवाला दिया। उनके अनुसार, एक सच्चा गुरु व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। यदि कोई व्यक्ति खुद को बहुत बुद्धिमान समझकर गुरु की अवहेलना करता है, तो वह जीवन के वास्तविक सार को समझने में चूक जाता है। उन्होंने आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सलाह दी।

आध्यात्मिकता और न्याय का संबंध

न्यायमूर्ति ने अपने संबोधन में आध्यात्मिकता को न्याय के करीब बताया। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कानूनों की किताबों तक सीमित नहीं है। नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्य भी एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जस्टिस स्वामीनाथन का मानना है कि गुरु की शिक्षाएं व्यक्ति को अनुशासित और न्यायप्रिय बनाती हैं। जब कोई व्यक्ति गुरु के चरणों में झुकता है, तो उसके भीतर का अहंकार समाप्त हो जाता है। यही विनम्रता उसे एक बेहतर इंसान और नागरिक बनाती है।

तर्क और विश्वास के बीच का संतुलन

जस्टिस स्वामीनाथन ने तर्कवादियों (Rationalists) को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि हर चीज को केवल विज्ञान और तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता। विश्वास एक ऐसी शक्ति है जो तर्क से परे काम करती है। जो लोग हर आध्यात्मिक अनुभव को अंधविश्वास कहकर खारिज करते हैं, वे जीवन की गहराई को नहीं देख पाते। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु का मार्गदर्शन जीवन के कठिन समय में एक प्रकाश स्तंभ की तरह कार्य करता है।

समाज के प्रति गुरुओं का योगदान

मद्रास हाई कोर्ट के जज ने समाज सुधार में आध्यात्मिक गुरुओं के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत में गुरुओं ने हमेशा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उनके संस्थानों ने लाखों लोगों का जीवन बदला है। ऐसे में गुरुओं की आलोचना करना या उन पर संदेह करना अनुचित है। जस्टिस स्वामीनाथन का यह बयान उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो आए दिन धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर सवाल उठाते रहते हैं।

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