म्यामांर तख्तापलट पर अमेरिका सख्त, जो बाइडेन ने सेना को दी प्रतिबंध लगाने की धमकी

म्यामांर में सेना की ओर से किए गए तख्तापलट पर अमेरिका ने सख्त हो गया है। नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है। उन्होंने म्यांमार की सेना को चेतावनी दी है। कहा कि हम प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में अमेरिका से दी जानी वाली मदद पर भी रिव्यू करना शुरू कर दिया गया है। बाइडेन ने आगे म्यांमार की सेना को तुरंत सत्ता छोड़कर स्टेट काउंसलर आंग सान सू की समेत सभी नेताओं को रिहा करने को कहा।

इंटरनेशनल कम्युनिटी इसके खिलाफ आवाज उठाए
बाइडेन ने म्यांमार मिलिट्री को चेतावनी देते हुए इंटरनेशनल कम्युनिटी को इसके खिलाफ आवाज उठाने को कहा। बाइडेन ने कहा, इंटरनेशनल कम्युनिटी को तुरंत इस मसले पर मिलिट्री के खिलाफ खड़े होना चाहिए और तुरंत वहां लोकतंत्र बहाल करने के लिए दबाव बनाना चाहिए।

एक साल के लिए सेना ने इमरजेंसी लगाई
सोमवार को म्यांमार में सेना ने सत्ता अपने कब्जे में कर ली। इसके बाद देश में एक साल के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है। सेना ने सोमवार तड़के देश की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की, प्रेसिडेंट यू विन मिंट समेत कई सीनियर नेताओं और अफसरों को गिरफ्तार कर लिया। राजधानी नेपाईतॉ की अहम इमारतों में सैनिक तैनात हैं। सड़कों पर बख्तरबंद वाहन गश्त कर रहे हैं। कई शहरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बंद कर दी गई है।

सेना के टीवी चैनल ने बताया कि मिलिट्री ने देश को कंट्रोल में ले लिया है। यू मिंट के दस्तखत वाली एक घोषणा के अनुसार, देश की सत्ता अब कमांडर-इन-चीफ ऑफ डिफेंस सर्विसेज मिन आंग ह्लाइंग के हाथ में रहेगी। देश के पहले वाइस प्रेसिडेंट माइंट स्वे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया है।

सेना के चैनल ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि, राष्ट्रीय स्थिरता खतरे में थी। जनरल मिन आंग ह्लाइंग को 2008 के संविधान के तहत सभी सरकारी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। इसे मिलिट्री रूल के तहत जारी किया गया था। इस बीच, आंग सान सू की की पार्टी ने म्यांमार के लोगों से तख्तापलट और सैन्य तानाशाही की वापसी का विरोध करने की अपील की है।

सेना ने कहा- इमरजेंसी खत्म होने के बाद चुनाव होंगे

म्यांमार की सेना ने कहा कि देश में 1 साल की इमरजेंसी खत्म होने के बाद चुनाव होंगे। इस दौरान इलेक्शन कमीशन में सुधार किया जाएगा। पिछले साल नवंबर में होने वाले चुनावों की समीक्षा भी की जाएगी। सेना ने कहा कि 8 नवंबर, 2020 को चुनावों में बड़े पैमाने पर वोटिंग फ्रॉड हुआ। पिछले साल 8 नवंबर को आए चुनावी नतीजों में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी (NLD) ने 83% सीटें जीत ली थीं। चुनाव आयोग ने चुनाव में धांधली के आरोपों को खारिज कर दिया था।

देश में 48 साल तक सेना का शासन रहा
म्यांमार में 1948 में आजादी मिलने के बाद से देश में ज्यादातर वक्त सेना का शासन रहा है। 1962 में सेना यहां सत्ता पर काबिज हो गई थी। सेना की तानाशाही से आजादी दिलाने के लिए आंग सान सू की ने 1988 में लड़ाई शुरू की। उनके नेतृत्व में 1989 में हजारों लोग लोकतंत्र की मांग कर तब की राजधानी यांगोन की सड़कों पर उतर गए।

सेना की ताकत के आगे सू की का आंदोलन कमजोर पड़ गया। उन्हें नजरबंद कर दिया गया। अगले 22 साल तक म्यांमार में सेना का ही शासन रहा। इनमें से 21 साल सू की नजरबंद रहीं। आखिरकार 2011 में उनकी लड़ाई खत्म हुई और सेना की जगह चुनी गई सरकार ने देश की बागडोर संभाली।

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