Delhi News: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर चर्चा में है। सोमवार रात कैंपस में हुए एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में छात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और व्यवसायी गौतम अडानी के खिलाफ नारे लगाते सुनाई दे रहे हैं। यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हुआ।
बीजेपी ने इस प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे ‘भारत विरोधी सोच’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अर्बन नक्सलियों ने देशद्रोहियों के समर्थन में यह प्रदर्शन किया। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सांपों के फन कुचले जा रहे हैं और सपोले बिलबिला रहे हैं।
प्रदर्शन के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, 5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में हुए हमले को छह साल पूरे होना। दूसरा, दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट का जमानत पर फैसला। छात्र संघ ने हमले के खिलाफ एक प्रतीकात्मक ‘गुरिल्ला ढाबा’ कार्यक्रम आयोजित किया था।
पुलिस कार्रवाई की संभावना
विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के खिलाफ अब तक दिल्ली पुलिस को कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पुलिस स्वत: संज्ञान ले सकती है। वायरल हुए वीडियो के बाद दबाव बढ़ गया है।
पिछले कुछ दिनों से कैंपस में पुस्तकालय में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम लगाने को लेकर भी विवाद चल रहा है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने छात्र संघ के कुछ पदाधिकारियों को नोटिस भी भेजा है। छात्र निगरानी तंत्र के विस्तार के विरोध में हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियां तीखी
बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका आरोप है कि यह प्रदर्शन देशद्रोही तत्वों के समर्थन में किया गया। विपक्षी दलों ने अभी तक इस मामले पर विस्तार से प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जेएनयू शिक्षक संघ ने 2020 के हमले की याद में एक बयान जारी किया। संघ ने आरोप लगाया कि हमलावर आज भी नकाबपोश हैं और उन्हें न्याय नहीं मिला। छात्र संघ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न्यायपालिका पर हमला बताया।
छात्रों की मांगें और भविष्य
छात्र संगठनों की मुख्य मांग 2020 के हमले के दोषियों को सजा दिलाने की है। साथ ही, वे उमर खालिद और शरजील इमाम सहित सभी छात्र कैदियों की रिहाई चाहते हैं। कैंपस में बढ़ती निगरानी व्यवस्था को भी वे रोकना चाहते हैं।
मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गर्माया हुआ है। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।

