Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला नगर निगम के घटनाक्रम पर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी ‘मित्र मंडली’ को फायदा पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख रहे हैं। ठाकुर के अनुसार, नगर निगम में ढाई साल के कार्यकाल के बाद मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित होना था। हालांकि, सरकार ने नियमों को दरकिनार कर महिलाओं के संवैधानिक अधिकार को छीन लिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को जनमत का अपमान करार दिया है।
मित्र प्रेम में संवैधानिक व्यवस्थाओं की अनदेखी
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वह अपने एक खास मित्र को सत्ता सुख दिलाने में व्यस्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मित्र मंडली के घेरे में इस कदर कैद हैं कि उन्हें सही-गलत का बोध नहीं रहा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नगर निगम शिमला में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उनके अनुसार, सिर्फ एक व्यक्ति की कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए आरक्षण के नियमों में फेरबदल करना अलोकतांत्रिक है। भाजपा ने सरकार की इस कार्यप्रणाली को पूरी तरह असंवैधानिक बताया है।
भाजपा पार्षदों को बाहर निकालने पर भड़के ठाकुर
सदन की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा पार्षदों को गलत तरीके से बाहर निकाला गया। उन्होंने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा इस अन्याय को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक जोरदार आंदोलन करेगी। ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बातें होती हैं और दूसरी तरफ उनके हक छीने जा रहे हैं।
होली की बधाई और सरकार को चेतावनी
नगर निगम के विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेशवासियों को होली के पावन पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी। जयराम ठाकुर ने मांग की कि नगर निगम में आरक्षण की व्यवस्था को नियमों के अनुसार ही लागू किया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे संवैधानिक पदों की गरिमा को मित्र प्रेम से ऊपर रखें। भाजपा अब इस मामले को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ने की तैयारी कर रही है।

