अपने गृह जिला में नगर निगम के लिए पहली बार होने जा रहे चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। यह नगर निगम एक तरफ जहां मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है, वहीं कांग्रेस यहां पर जीत हासिल करके अपना कद बढ़ाने की उम्मीद में है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां जिला में कहीं भी लीड नहीं मिली थी और अब नगर निगम में वापसी की उम्मीद के साथ कांग्रेस एकजुट तो दिखाई दे रही है, लेकिन गलत टिकट आबंटन से यहां भी पार्टी में खलबली मची हुई है। हालांकि भाजपा में भी बागियों की एक तरह से बाढ़ सी आ गई है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि स्वयं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसे भांपते हुए शिमला छोड़कर मंडी में ही 2 दिन के लिए डेरा जमा लिया है ताकि रूठों और बागियों को मनाया जा सके। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पिछले दिनों कार्यकर्ताओं से स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि उन्हें मेयर बनाने लायक नहीं बल्कि सारी नगर निगम यानी 15 सीटों पर कब्जा चाहिए।

कांग्रेस ने जीएस बाली के कंधों पर छोड़ा जीत का दारोमदार

इधर, कांग्रेस ने यहां तेजतर्रार नेता पूर्व मंत्री जीएस बाली को प्रभारी बनाकर जीत का दारोमदार उनके कंधों पर छोड़ दिया है। कांग्रेस बाहर से एकजुट तो दिखाई दे रही है, लेकिन अंदरखाते टिकट न मिलने से नाराज कार्यकत्र्ताओं के प्रचार ने समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं। पार्टी यहां सभी को एक साथ लेकर तो चल रही है, लेकिन यहां एक सीट पर नामांकन के आखिरी दिन भी टिकट बदलना पड़ा है, जबकि 5 वार्डों में इनके भी बागी खड़े हो गए हैं। अब देखना यह है कि कांग्रेस और भाजपा कितने रूठों को 2 दिन में मना पाती हैं और नामांकन वापसी के आखिरी दिन के बाद कितने मैदान में रहकर समीकरण बिगाड़ते हैं। 

अनिल शर्मा नहीं निकल पा रहे बाहर

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी के बार रूम में भाजपा टिकट से विधायक बने हुए अनिल शर्मा भी मोर्चा संभाले हुए हैं लेकिन वे किसी का खुलकर प्रचार करने के लिए बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उनके पुत्र कांग्रेस महासचिव आश्रय शर्मा ही उनके निर्देशों पर फील्ड में सक्रिय हैं। भाजपा उनके खिलाफ इन चुनावों में घेराबंदी के लिए पहले ही तैयार बैठी है लेकिन अनिल शर्मा अपने घर से ही चाबी घुमा रहे हैं। भाजपा आरोप लगा चुकी है कि अनिल शर्मा कांग्रेस का छुपकर प्रचार कर रहे हैं।

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