भारतीय जेलों में ‘मौत’ का भयानक खेल चल रहा है। सुपारी लेकर ‘माफिया’ द्वारा कड़ी सुरक्षा में रहने वाले कैदियों को आसानी से मौत दे दी जाती है। हाई सिक्योरिटी जेलों में मोबाइल फोन, चाकू, पिस्टल, रस्सी, पत्थर और रस्सी, ये सब पहुंचाना कोई मुश्किल काम नहीं है। देश की विभिन्न जेलों में महज 365 दिन के दौरान न्यायिक हिरासत में बंद 1584 लोग मारे गए हैं। इनमें हत्या, आत्महत्या और गंभीर बीमारी वाले लोग भी शामिल हैं। यूपी की एक जेल में बंद गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है, डिप्टी सीएमओ योगेंद्र सिंह सचान की भी जेल से मरने की खबर आती है। दिल्ली में सेना के एक पूर्व अफसर की तिहाड़ जेल में पहुंचते ही रहस्यमय हालात में मौत हो जाती है। इसी जेल में दिन दहाड़े, न्यायिक हिरासत में बंद एक युवक को चाकुओं से गोद कर मार दिया जाता है।

तिहाड़ जेल में लंबे समय तक डीजी रहे एजीएमयू कैडर के आईपीएस अधिकारी, जो कि अब सेवानिवृत हो चुके हैं, ने अनौपचारिक बातचीत में कहा है कि बहुत सी जेलों में माफिया काम करता है। इस माफिया की प्रकृति अलग-अलग होती है। इनके पीछे भी एक सिंडिकेट होता है। ये लोग बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली होते हैं। दरअसल, इन्हें प्रभावशाली कहना ठीक नहीं होगा, इनके पीछे जो लोग खड़े हैं, वे प्रभावशाली शब्द की श्रेणी में ठीक बैठते हैं। तकरीबन हर जेल में गैंगस्टर रहते हैं। उन्हें बाहर से जैसा आदेश मिलता है, वे अपराध को अंजाम दे देते हैं। अब ऐसा भी नहीं है कि जेल में तैनात स्टाफ इस तरह के अपराध को रोकना नहीं चाहता है, वह प्रयास करता है, लेकिन कई बार उन्हें ‘प्रभावशाली’ शब्द के चलते निराशा हाथ लगती है। जेल मैनुअल में भी अनेक कमियां हैं। रही बात स्टाफ की तो वह भी कम नहीं है। अनेक कर्मचारी तो ऐसे होते हैं कि वे अपनी भर्ती के बाद से लेकर रिटायरमेंट तक उसी जेल में रहते हैं।  अधिकारी का कहना है कि यह भी अपराध की एक बड़ी वजह है। समझने वाली बात ये भी है कि निचले स्टाफ की हिम्मत उस वक्त तक नहीं होगी, जब तक बड़े ओहदे पर बैठे लोगों का हाथ उनके सिर पर न हो। उन्हें यह भरोसा मिल जाता है कि अपराध के बाद उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा, कोई सबूत नहीं मिलेगा और कुछ दिन बाद वह केस बंद हो जाएगा। ऐसी स्थिति में वे मर्डर करने से भी पीछे नहीं हटते। 
एक अप्रैल 2019 से लेकर 31 मार्च 2020 तक की स्थिति
देश में पुलिस हिरासत के दौरान मारे गए लोगों की संख्या 113 थी, जबकि न्यायिक हिरासत में मरने वालों का आंकड़ा 1585 रहा है। 

राज्यों में न्यायिक हिरासत में मौत उत्तर प्रदेश 400, मध्यप्रदेश 143, पश्चिम बंगाल 115, बिहार 105, पंजाब 93, दिल्ली में 47, महाराष्ट्र 91, गुजरात 53, हरियाणा 74, राजस्थान 79, ओडिशा 59 और तमिलनाडु में 57 लोगों की न्यायिक हिरासत में मौत हो गई। 

By RIGHT NEWS INDIA

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