मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलो में उड़ान होती है। इन्हीं पंक्तियों को सच कर दिखाया है ऊना जिला के छोटे से गांव से निकल अमेरिका में Zscaler नाम से बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले जय चौधरी ने। दरअसल जय चौधरी का असली नाम जगतार सिंह चौधरी है। 62 साल के जय चौधरी का जन्म जिला ऊना के गांव पनोह में पिता भगत सिंह और माता सुरजीत कौर के घर में हुआ था। 3 भाइयों में सबसे छोटे जय चौधरी की 3 बहने भी हैं। जय चौधरी का बचपन से ही पढ़ाई से बहुत लगाव था। पैतृक गांव पनोह के ही प्राइमरी स्कूल में प्राथमिक शिक्षा हासिल करने के बाद जय चौधरी ने सरकारी स्कूल धुसाड़ा में मैट्रिक तक की पढ़ाई की है। जय चौधरी 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के लिए 4 किलोमीटर पैदल जाते थे और गांव में ही बट्ट वृक्ष के नीचे बैठकर पढ़ा करते थे। उस समय गांव में बिजली भी नहीं हुआ करती थी।

मिडल और हाई स्कूलिंग के दौरान जय चौधरी ने प्रदेश के स्कूल शिक्षा बोर्ड की मैरिट लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवाया। वहीं ऊना में शुरू हुए कॉलेज में प्रेप करते हुए भी यूनिवर्सिटी में टॉप किया। उसके बाद बीएचयू वनारस में बीटैक करने के बाद अमेरिका में एमटैक की पढ़ाई की। किसान पिता के घर जन्मे जय चौधरी को इस मुकाम तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा लेकिन जय चौधरी ने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपना मुकाम हासिल कर लिया। इस बार की हुरून ग्लोबल रिच लिस्ट 2021 में जय चौधरी ने दुनिया के टॉप अरबपतियों में स्थान पाया है। वही अब वह भारत के टॉप-10 अरबपतियों में शामिल हो गए हैं।

य चौधरी ने 2008 में Zscaler के नाम से साइबर सिक्योरिटी कंपनी शुरू की थी, जिसके बाद 2018 में कंपनी का आईपीओ लॉन्च किया था। जय चौधरी की इस सफलता से उनके सबसे बड़े भाई दलजीत सिंह भी खासे उत्साहित हैं। प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत हुए जय चौधरी के भाई दलजीत बताते हैं कि जगतार शुरू से ही पढ़ने में बहुत होशियार थे और जब जय छठी में थे तो वो उनके बीए के निबंध तक लिख लेते थे। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय जय चौधरी को ही दिया। उन्होंने बताया कि जय चौधरी जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं और इस मुकाम ओर पहुंचने के बाबजूद भी उनमें कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने बताया कि जय की पत्नी भी बहुत अच्छी हैं और उनके माता-पिता भी अमेरिका में ही उनके पास हैं।

वहीं जय चौधरी के दोस्त और सहपाठी रहे अशोक कुमार की मानें तो जगतार पढ़ाई में शुरू से ही प्रतिभाशाली रहे हैं। अशोक पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि वो जय के साथ गांव से 4 किलोमीटर दूर स्कूल को पैदल जाते थे और स्कूल के बाद पशुओं को चराने भी इकट्ठे ही जाते थे। जय चौधरी अमेरिका में रहते हुए भी अपने क्षेत्र में समाजसेवा करने से पीछे नहीं रहते हैं। जय चौधरी जिन-जिन स्कूलों में पढ़े हैं, उनके अलावा साथ लगते स्कूलों को भी जय चौधरी ने मुलभूत सुविधाओं के लिए आर्थिक मदद की है।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धुसाड़ा में मेरे स्कूल के मोती पटल पर भी जय चौधरी का नाम जगतार सिंह चौधरी के नाम से अंकित है। स्कूल के प्रधानाचार्य देसराज ने जय चौधरी की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है। प्रधानाचार्य ने बताया कि बेशक जय चौधरी अमेरिका में रहते हैं लेकिन वो हमेशा स्कूल को मदद के लिए काम करते रहते हैं।

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