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इसरो ने दिया झटका तो DRDO ने दी गुड न्यूज, भारत के लिए कैसा रहा यह ‘अजीब’ सोमवार?

New Delhi News: भारत के लिए सोमवार का दिन भावनाओं के ज्वार-भाटा जैसा रहा। एक तरफ देश की स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) के खेमे से मायूस करने वाली खबर आई, तो कुछ ही घंटों बाद डीआरडीओ ने देशवासियों को जश्न मनाने का मौका दे दिया। सोमवार सुबह इसरो का एक अहम मिशन तकनीकी खामियों का शिकार हो गया। हालांकि, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक ऐसी घातक मिसाइल का सफल टेस्ट किया जो दुश्मन को भागने का मौका नहीं देगी। आइए जानते हैं विज्ञान और रक्षा क्षेत्र के लिए कैसा रहा यह दिन।

इसरो के मिशन में क्या हुई गड़बड़ी?

सोमवार की सुबह उम्मीदों के साथ शुरू हुई थी। इसरो ने अपने PSLV C62 रॉकेट को लॉन्च किया। यह रॉकेट ईओएस-एन1 (EOS-N1) मिशन को लेकर अंतरिक्ष की ओर बढ़ा था। लॉन्चिंग की शुरुआत सही रही, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद सब कुछ बदल गया। रॉकेट अपने तय रास्ते से भटक गया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, रास्ता भटकने के कारण यह मिशन अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका। इसरो ने तुरंत सभी ग्राउंड स्टेशनों से संपर्क साधा है। वैज्ञानिक अब पूरे डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। वे यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर चूक कहां हुई। अगर यह मिशन कामयाब होता, तो स्पेस साइंस में भारत का कद और ऊंचा हो जाता।

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डीआरडीओ ने दुश्मन के लिए तैयार किया ‘काल’

इसरो से मिली निराशा के बीच डीआरडीओ ने एक बड़ी खुशखबरी साझा की। डीआरडीओ ने स्वदेशी ‘मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल’ (MPATGM) का सफल परीक्षण किया। यह टेस्ट रविवार को किया गया था, लेकिन इसकी आधिकारिक जानकारी सोमवार को दी गई।
यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किए जाने की खबर है। यह मिसाइल ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) तकनीक पर काम करती है। इसका मतलब है कि एक बार टार्गेट सेट करने के बाद मिसाइल अपने आप लक्ष्य को ढूंढकर खत्म कर देती है।

भागते हुए टार्गेट को भी नहीं छोड़ेगी मिसाइल

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी इसकी सटीकता है। परीक्षण के दौरान इसने एक चलते हुए डमी टैंक को निशाना बनाया। यह मिसाइल टॉप अटैक मोड (Top Attack Mode) से लैस है। इसका अर्थ है कि यह दुश्मन के टैंक पर ऊपर से हमला करती है। टैंक का ऊपरी हिस्सा सबसे कमजोर होता है, इसलिए यह वार खाली नहीं जाता।
आधुनिक टैंकों में सुरक्षा के लिए एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) लगा होता है। डीआरडीओ की यह मिसाइल उस सुरक्षा चक्र को भी तोड़ने में सक्षम है।

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सेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

यह मिसाइल भारतीय सेना के पैदल सैनिकों (इन्फैंट्री) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसकी खास बातें इसे बेहद घातक बनाती हैं:

  • वजन: इसका पूरा सिस्टम (मिसाइल और लॉन्चर) 14 से 15 किलो का है। इसे एक अकेला सैनिक आसानी से उठाकर ले जा सकता है।
  • रेंज: यह 2.5 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के टैंक को तबाह कर सकती है।
  • हर मौसम में कारगर: इसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सिस्टम लगा है। यह दिन हो या रात, बारिश हो या धुंध, हर हाल में सटीक काम करती है।
    इसरो की विफलता से मिला सबक और डीआरडीओ की सफलता, दोनों ही भारत की वैज्ञानिक यात्रा के अहम पड़ाव हैं।

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