New Delhi News: विदेश यात्रा के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज पासपोर्ट और वीजा (Visa) होते हैं। अक्सर खबरों में ‘स्टेपल्ड वीजा’ को लेकर चर्चा होती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह सामान्य वीजा से कितना अलग और खतरनाक हो सकता है। यह महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि दो देशों के बीच भारी विवाद की जड़ है। अगर आपके पासपोर्ट पर भी यह लगा है, तो आपको एयरपोर्ट से ही वापस लौटना पड़ सकता है।
आखिर क्या होता है स्टेपल्ड वीजा?
आम तौर पर वीजा आपके पासपोर्ट के पन्नों पर मुहर या स्टिकर के रूप में लगा होता है। यह स्थायी होता है। लेकिन स्टेपल्ड वीजा इसके बिल्कुल उलट है। यह एक अलग कागज पर जारी किया जाता है। इसे पासपोर्ट पर चिपकाने के बजाय पिन या स्टेपलर से नत्थी कर दिया जाता है। इसे बाद में आसानी से फाड़कर हटाया जा सकता है। इसका मतलब है कि आपके पासपोर्ट पर उस देश की यात्रा का कोई पक्का सबूत नहीं रहता।
चीन क्यों करता है इसका इस्तेमाल?
स्टेपल्ड वीजा देना कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है। यह एक कूटनीतिक चाल होती है। जब कोई देश किसी दूसरे देश के राज्य या क्षेत्र को उसका हिस्सा नहीं मानता, तब वह वहां के नागरिकों को ऐसा वीजा देता है। यह उस देश की संप्रभुता को न मानने का एक तरीका है। चीन अक्सर भारत के अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए यही तरीका अपनाता है। वह इन हिस्सों को विवादित बताने के लिए ऐसा करता है।
भारत में यह क्यों नहीं चलता?
भारत सरकार स्टेपल्ड वीजा को सख्त तौर पर खारिज करती है। इसे एक वैध यात्रा दस्तावेज नहीं माना जाता है। भारत का स्पष्ट मानना है कि यह देश की अखंडता के खिलाफ है। अगर किसी यात्री के पास ऐसा वीजा पाया जाता है, तो उसे प्लेन में चढ़ने की अनुमति नहीं मिलती। अतीत में कई बार भारतीय खिलाड़ियों और नागरिकों को एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया है। इसलिए विदेश जाते समय सही वीजा होना बेहद जरूरी है।

