India News: क्या आपको किसी दोस्त या रिश्तेदार का अचानक फोन आया है? क्या वह मुसीबत में है और तुरंत पैसों की मांग कर रहा है? अगर हां, तो पैसा भेजने से पहले रुक जाइए। यह कॉल असली नहीं, बल्कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) का खतरनाक खेल हो सकता है। आजकल साइबर ठग आपकी भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं। वे हूबहू आपके करीबियों की आवाज में बात कर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस ने इस नए ‘वॉयस स्कैम’ को लेकर देश भर में गंभीर चेतावनी जारी की है।
आवाज की नकल कर ऐसे बिछा रहे जाल
ठग अब तकनीक का बेहद शातिर तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी AI टूल्स के जरिए किसी की भी आवाज कॉपी कर लेते हैं। ये ठग आपके माता-पिता, भाई-बहन या खास दोस्त बनकर कॉल करते हैं। फोन पर वे अक्सर रोते हैं या खुद को किसी बड़ी मुसीबत में बताते हैं। तकनीक इतनी एडवांस है कि आवाज पहचानना एक आम इंसान के लिए नामुमकिन हो जाता है। उनकी आवाज सुनकर आप भावुक हो जाते हैं और ठग इसी का फायदा उठाते हैं।
तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का बनाते हैं दबाव
अपराधी पीड़ित को सोचने का बिल्कुल वक्त नहीं देते। वे एक्सीडेंट, गिरफ्तारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसी झूठी कहानी सुनाते हैं। वे तुरंत यूपीआई (UPI) या ऑनलाइन बैंकिंग से पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं। डर और घबराहट के कारण पीड़ित खुद पड़ताल करना भूल जाता है। जल्दबाजी में लिया गया यह फैसला सीधे आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। कई मामलों में ठग खुद को पुलिस या बड़ा अधिकारी बताकर भी डराते हैं।
बचाव के लिए तुरंत उठाएं ये कदम
पुलिस ने स्पष्ट सलाह दी है कि किसी भी इमोशनल कॉल पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। अगर कोई करीबी पैसे मांगे, तो पहले फोन काट दें। फिर उस व्यक्ति के निजी नंबर पर खुद कॉल करके पुष्टि करें। वीडियो कॉल करना भी एक अच्छा विकल्प है। अगर फिर भी आपके साथ धोखा हो जाए, तो एक पल भी बर्बाद न करें। तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा आप cyber-crime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शुरुआती ‘गोल्डन ऑवर’ में शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

