Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सस्पेंस अब खत्म होता नजर आ रहा है। हाईकोर्ट के कड़े फैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुद को ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा कि मिल-जुलकर समाधान निकाला जाएगा। ताजा Himachal News के अनुसार, खाची ने साफ कर दिया है कि आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। बस सरकार रोस्टर फाइनल कर दे, आगे का काम आयोग संभाल लेगा।
अप्रैल में बज सकती है चुनावी रणभेरी
अनिल खाची ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल में चुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। फरवरी और मार्च में विधानसभा का बजट सत्र है। साथ ही बच्चों की परीक्षाएं भी होनी हैं। ऐसे में पुलिस और चुनाव स्टाफ व्यस्त रहेगा। पंचायत चुनाव के लिए करीब 40 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। इसलिए अप्रैल में स्टाफ की उपलब्धता आसानी से हो जाएगी। आयोग हर जिले में एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में है।
रोस्टर और जनगणना पर फंसा पेंच
सरकार वार्डों का नया रोस्टर और पुनर्गठन चाहती है। वहीं, निर्वाचन आयोग ने 2011 की जनगणना के आधार पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। Himachal News में यह मुद्दा छाया हुआ है। आयोग का कहना है कि नए सिरे से वार्ड बनाने में वक्त लगेगा। जिन पंचायतों में दिक्कत है, वहां बाद में चुनाव हो सकते हैं। प्रदेश में अभी 3,577 पंचायतें हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार और आयोग के बीच बैठकों का दौर जारी है।
सुप्रीम कोर्ट जा सकती है सुक्खू सरकार
इस बीच, महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि सरकार चुनाव से भाग नहीं रही है। आपदा से पहले ही प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की टाइमलाइन में चुनाव कराना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। सरकार इस पर चर्चा कर रही है। चर्चा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल आयोग ने अपने अधिकारियों को तैयार रहने के निर्देश दे दिए हैं।

