Mumbai News: शेयर बाजार में जब भी गिरावट आती है, तो निवेशक इसे खरीदारी के अवसर के रूप में देखते हैं। हालांकि, इस दौरान म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले अक्सर दुविधा में रहते हैं। वे तय नहीं कर पाते कि एकमुश्त (Lumpsum) पैसा लगाएं या एसआईपी (SIP) के जरिए धीरे-धीरे आगे बढ़ें। बाजार के जानकारों के अनुसार, निवेश का तरीका आपकी जोखिम क्षमता और लक्ष्यों पर निर्भर करता है। गिरते बाजार में एसआईपी और एकमुश्त निवेश, दोनों के अपने तकनीकी फायदे और नुकसान हैं, जिन्हें समझना एक समझदार निवेशक के लिए बेहद जरूरी है।
एसआईपी और एकमुश्त निवेश के बीच का अंतर
निवेश के इन दो प्रमुख तरीकों में बुनियादी अंतर समय और राशि का है। एकमुश्त निवेश में निवेशक के पास मौजूद पूरी पूंजी एक ही बार में बाजार में लगा दी जाती है। इसके विपरीत, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में एक तय अंतराल पर छोटी-छोटी राशि का निवेश होता है। जब बाजार में अस्थिरता होती है, तो यह चुनना कठिन हो जाता है कि कौन सा विकल्प लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देगा।
गिरते बाजार में क्यों फायदेमंद है एसआईपी?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि गिरते बाजार में एसआईपी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है। इसकी मुख्य वजह ‘रुपया कॉस्ट एवरेजिंग’ है। जब बाजार नीचे जाता है, तो एसआईपी के जरिए समान राशि में आपको अधिक म्यूचुअल फंड यूनिट्स मिलती हैं। उदाहरण के लिए, यदि निफ्टी 24,500 से गिरकर 24,000 पर आ जाए, तो अगले महीने आपकी एसआईपी उसी राशि में ज्यादा यूनिट्स खरीदेगी। इससे आपकी खरीद लागत औसत हो जाती है, जो भविष्य में रिकवरी के समय बंपर मुनाफा दे सकती है।
हाइब्रिड रणनीति: दोनों का तालमेल भी है विकल्प
कई निवेशक मध्यम मार्ग चुनते हैं। वे उपलब्ध पूंजी का एक हिस्सा तुरंत एकमुश्त निवेश कर देते हैं और बाकी राशि को एसआईपी में बांट देते हैं। यह रणनीति उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो बाजार के निचले स्तर (Bottom) को नहीं चूकना चाहते, लेकिन साथ ही गिरावट जारी रहने की स्थिति में जोखिम भी कम रखना चाहते हैं। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए एक्सपर्ट्स अनुशासन के साथ निवेश जारी रखने की सलाह देते हैं।

