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ईरान के निर्वासित युवराज ने किया बड़ा दावा: ‘इस्लामी गणराज्य पतन के कगार पर, 48 घंटे में 12,000 लोगों का नरसंहार’

International News: ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने सत्ताधारी तंत्र के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गुजारिश की है। उन्होंने शुक्रवार को वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पहलवी ने कहा कि इस्लामी गणराज्य पतन के कगार पर है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरानी लोगों की रक्षा का आह्वान किया।

पहलवी ने ईरान में चल रहे संघर्ष को कब्जे और मुक्ति के बीच का बताया। उन्होंने साफ कहा कि यह सुधार और क्रांति के बीच का संघर्ष नहीं है। उनके मुताबिक तथाकथित इस्लामी गणराज्य ईरान की सरकार नहीं है। यह एक शत्रुतापूर्ण कब्जा करने वाली ताकत है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

रजापहलवी ने ईरानी शासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शासन ने नागरिकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा का इस्तेमाल किया है। पहलवी ने दावा किया कि अड़तालीस घंटों में बारह हज़ार से ज्यादा ईरानियों का नरसंहार किया गया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि ईरान के लोगों को सड़कों और घरों में मारा जा रहा है। शासन दया नहीं दिखाता है। पहलवी ने अस्पतालों में हुई हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खामेनेई के हत्यारों ने घायल प्रदर्शनकारियों का पीछा किया।

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अस्पतालों में भी घायलों को बेरहमी से मार डाला गया। यह आरोप बहुत गंभीर हैं। इनसे ईरान में मानवाधिकार हनन की स्थिति का पता चलता है। अंतरराष्ट्रीय संगठन भी पहले ही इन हालात पर चिंता जता चुके हैं।

शासन को घायल जानवर बताया

पहलवीने कहा कि हिंसा के बावजूद शासन की स्थिति कमजोर हो रही है। इस्लामिक गणराज्य पतन के कगार पर है। इसीलिए वे एक घायल जानवर की तरह हिंसक हो रहे हैं। सत्ता से चिपके रहने के लिए वह बेताब हैं।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने को कहा। पहलवी ने स्पष्ट मांग रखी कि ईरानी शासन की दमनकारी क्षमता को कमजोर किया जाए। इससे ईरानी लोगों की रक्षा हो सकेगी। उन्होंने आर्थिक दबाव डालने की बात कही।

पहलवी ने कहा कि विश्व भर में शासन की संपत्तियों को अवरुद्ध करना चाहिए। उनके फर्जी टैंकरों के बेड़े को निशाना बनाकर नष्ट करना चाहिए। यह कदम शासन की आर्थिक ताकत को कमजोर करेगा। इससे जनता पर हो रहे अत्याचार पर भी रोक लग सकती है।

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अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की गुहार

निर्वासित युवराज नेवाशिंगटन में भरी हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सच्चाई अब निर्विवाद है। तथाकथित इस्लामी गणराज्य ने मातृभूमि पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने पश्चिमी देशों से तुरंत कार्रवाई की अपील की।

पहलवी ने कहा कि शासन के पतन से केवल जानमाल का नुकसान बढ़ेगा। इसलिए समय रहते कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों से हस्तक्षेप की मांग की। मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर ध्यान देने को कहा।

ईरान में हाल के महीनों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। महसा अमीनी की मौत के बाद से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सरकार ने इन प्रदर्शनों को कड़ाई से दबाया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी हिंसा की कई रिपोर्ट्स प्रकाशित की हैं।

रजा पहलवी का यह बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है। वह पहले भी ईरानी शासन के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उनका परिवार ईरान के पूर्व शाह से संबंधित है। 1979 की क्रांति के बाद से वह निर्वासन में जीवन बिता रहे हैं। उनकी यह अपील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी है।

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