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Iran vs US War: अमेरिका तक नहीं पहुंच पाएंगी ईरान की मिसाइलें, फिर भी ट्रम्प को सता रहा इस बात का डर!

International News: अमेरिका के पास ईरान पर बमबारी करने की पूरी क्षमता है। अमेरिकी बॉम्बर 37 घंटे उड़ान भरकर तेहरान पर हमला कर सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ईरान के पलटवार का है। क्या ईरान की मिसाइलें अमेरिका तक पहुंच पाएंगी? नक्शे को देखें तो अमेरिका बहुत दूर है। इसके बावजूद तेहरान ने बदला लेने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान की मिसाइलें वाशिंगटन नहीं, बल्कि अमेरिका के 8 करीबी ठिकानों को निशाना बनाएंगी। ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद करके खतरे का संकेत दे दिया है।

अमेरिका की दूरी और ईरान की मजबूरी

ईरान के पास करीब 6 लाख एक्टिव सैनिकों की फौज है। दुनिया की सैन्य ताकतों में वह 16वें नंबर पर आता है। उसके पास लंबी दूरी की मिसाइलें, खतरनाक ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं। फिर भी अमेरिका को सीधे निशाना बनाना उसके लिए नामुमकिन है। दरअसल, ईरान से अमेरिका के पूर्वी तट की दूरी करीब 11,000 किलोमीटर है। वहीं, ईरान की सबसे ताकतवर बैलिस्टिक मिसाइलें केवल 2000 से 2500 किलोमीटर तक ही मार कर सकती हैं। इसका मतलब है कि ईरानी मिसाइलें अमेरिका तक पहुंचने के लिए एक चौथाई रास्ता भी तय नहीं कर पाएंगी।

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घातक शेजिल मिसाइल की हकीकत

सोशल मीडिया पर ईरान अक्सर अपनी ‘शेजिल मिसाइल’ की ताकत दिखाता है। दावा किया जाता है कि यह बहुत विनाशकारी है। लेकिन सच यह है कि इसकी रेंज भी 2500 किलोमीटर से ज्यादा नहीं है। ईरान अपने हथियारों का प्रदर्शन परेड में करता रहता है। उसके ‘शहीद ड्रोन’ का इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन युद्ध में किया है। सूडान में भी ईरानी हथियार देखे गए हैं। ईरान को मिसाइल प्रोग्राम में चीन, रूस और नॉर्थ कोरिया से मदद मिलती है। लेकिन सीधी लड़ाई में अमेरिका की धरती तक पहुंचना उसके बस की बात नहीं है।

प्लान बी: ‘रिंग ऑफ फायर’ में अमेरिकी अड्डे

अमेरिका तक न पहुंच पाने पर ईरान क्या करेगा? इसका जवाब है- पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे। तेहरान के पास इस इलाके में एंटी-शिप और क्रूज मिसाइलों का बड़ा जखीरा है। ये मिसाइलें इजरायल और पूरे मध्य पूर्व को तबाह कर सकती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने अपने पड़ोसी देशों को चेतावनी दे दी है। अगर ट्रम्प ने हमला किया, तो उनके देशों में मौजूद अमेरिकी अड्डों पर मिसाइलें बरसी जाएंगी। अमेरिका को भी इस खतरे का अंदाजा है, इसलिए उसने कुछ अड्डों को खाली करना शुरू कर दिया है।

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ईरान की जद में ये 8 अमेरिकी ठिकाने

ईरान की मिसाइल रेंज में अमेरिका के कई बड़े मिलिट्री बेस आते हैं। अगर युद्ध हुआ तो यहाँ तबाही मच सकती है:

  • बहरीन: यहाँ अमेरिकी नेवी के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है। यह गल्फ से लेकर हिंद महासागर तक नजर रखता है।
  • कतर: यहाँ अल-उदेद एयरबेस है। यह पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा अमेरिकी अड्डा है, जहाँ 10 हजार सैनिक तैनात हैं।
  • कुवैत: इराकी सीमा के पास 40 किमी के दायरे में अमेरिकी सेना के कई बेस हैं।
  • UAE: अबू धाबी का अल धाफरा एयरबेस अमेरिकी एयरफोर्स का बड़ा हब है।
  • इराक: यहाँ अनबर प्रांत का अल असद एयरबेस निशाने पर है।
  • सऊदी अरब: प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर 2000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं।
  • जॉर्डन: यहाँ राजधानी अम्मान के पास अल साल्टी एयर बेस पर अमेरिकी एयरफोर्स है।
  • तुर्की: इनसर्लिक एयरबेस पर करीब 1500 सैनिक हैं। दावा किया जाता है कि यहाँ अमेरिका के न्यूक्लियर वॉरहेड भी रखे हैं।

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