International News: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा के बीच तनाव बढ़ रहा है। पिछले पंद्रह दिनों से देश में हालात गंभीर बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिष्ठानों पर हवाई हमले की धमकी दी है। हालांकि, सीधी सैन्य कार्रवाई के बजाय अमेरिका ने आर्थिक दबाव बढ़ाने का रास्ता चुना है। इसके तहत ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आदेश दिया गया है।
इस आदेश का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया है। भारत पहले से ही अमेरिका पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का भुगतान कर रहा है। इसमें रूस से तेल आयात को लेकर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल हैं। अब ईरान के साथ व्यापार के चलते भारत को कुल 75 प्रतिशत तक टैरिफ देना पड़ सकता है।
इससे भारत और ईरान के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध प्रभावित होंगे। साथ ही, अमेरिका के साथ व्यापार करने की लागत भी बढ़ जाएगी। टैरिफ को लेकर भारत और अमेरिका के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा सकता है। नई नीति का असर ईरान के साथ भारत के तेल आयात पर सबसे ज्यादा दिखेगा।
तेल आयात पर गहरा असर
ईरान केसाथ भारत का तेल व्यापार पहले ही कम हुआ है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात कम कर दिया था। साल 2018-19 के बाद से इस आयात में 87 प्रतिशत की गिरावट आई है। एक समय ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था। अब भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल रूस और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अन्य देशों से आयात करता है।
नए टैरिफ के कारण ईरान के साथ बचे-खुचे व्यापार पर भी रोक लग सकती है। इससे दोनों देशों के बीच अन्य वस्तुओं के आयात-निर्यात पर भी असर पड़ेगा। भारत की विदेश नीति के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। भारत को ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना होगा।
तेल की कीमतों पर खतरा
ईरान मेंबढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। अगर हालात और बिगड़े तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने की कोशिश कर सकता है। यह जलमार्ग विश्व के तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके बंद होने से तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी।
आपूर्ति में कमी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी। भारत जैसे आयातक देशों को महंगे दामों पर तेल खरीदना पड़ेगा। बढ़ी हुई कीमतों का असर घरेलू बाजार में दिखाई देगा। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस जैसे उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव
तेल कीकीमतों में बढ़ोतरी से भारत के व्यापार घाटे और महंगाई दर पर दबाव पड़ेगा। परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से सामानों की कीमतें चढ़ेंगी। इससे उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा। केंद्र और राज्य सरकारों के लिए ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल हो जाएगा।
सरकार को नीतिगत फैसलों की चुनौती भी होगी। विदेश नीति के साथ-साथ आर्थिक नीति में भी सावधानी बरतनी होगी। भारत को अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर देना होगा। रूस और सऊदी अरब जैसे देशों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
वैश्विक राजनीति में बदलाव से भारत को नए समीकरण बनाने होंगे। ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों और चाबहार बंदरगाह जैसी रणनीतिक परियोजनाओं का भविष्य भी इन फैसलों से प्रभावित होगा। अगले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।
