Iran News: वर्तमान सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। निर्वासन में रह रहे शाहजादे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता को खुली चुनौती दे रहे हैं। वे स्वयं को देश में लोकतांत्रिक बदलाव की एक प्रमुख आवाज के रूप में पेश कर रहे हैं।
रजा पहलवी का जन्म 1960 में तेहरान में हुआ था। 1967 में उन्हें आधिकारिक रूप से ईरान का क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था। 1979 की इस्लामी क्रांति ने उनके और उनके परिवार के भविष्य के सारे प्लान बदल दिए। तत्कालीन शाह के खिलाफ उभरे जन आंदोजलन के बाद परिवार को देश छोड़ना पड़ा।
रजा पहलवी लंबे समय से अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। इसके बावजूद वे खुद को ईरानी राजनीति से जोड़े हुए हैं। वे लोकतंत्र, मानवाधिकार और धर्मनिरपेक्ष शासन की वकालत करते आए हैं। उनका दावा है कि उनका लक्ष्य सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि ईरानी जनता को चुनाव का अधिकार दिलाना है।
हाल के दिनों में ईरान में आर्थिक संकट और राजनीतिक दमन के खिलाफ प्रदर्शन तेज हुए हैं। इन हालात में रजा पहलवी ने सक्रिय होकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने लोगों से सड़कों पर डटे रहने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि खामेनेई का शासन कमजोर पड़ रहा है।
रजा पहलवी का कहना है कि ईरानी सुरक्षा बलों के भीतर भी असंतोष है। उनके मुताबिक कई जवान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विदेशों में रहने वाले ईरानी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
ईरानी सरकार का आरोप
ईरानीसरकार रजा पहलवी और उनकी गतिविधियों को विदेशी एजेंडे का हिस्सा बताती है। सरकार का आरोप है कि ये प्रदर्शन अमेरिका और इजराइल जैसी बाहरी ताकतों द्वारा भड़काए जा रहे हैं। आधिकारिक रुख यह है कि देश की शांति को भंग करने का प्रयास किया जा रहा है।
ईरान की स्थापना 1979 की क्रांति के बाद हुई थी। इस क्रांति ने राजशाही को खत्म कर दिया था। तब से देश एक इस्लामिक गणराज्य के रूप में चला आ रहा है। सर्वोच्च नेता का पद सबसे शक्तिशाली माना जाता है जबकि राष्ट्रपति का चुनाव जनता करती है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
इस बीच अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ईरान में घटनाक्रम को देखते हुए अमेरिका कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने आशंका जताई कि वहां आम नागरिकों की मौत हो सकती है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सत्ता पर काबिज लोग हिंसा के सहारे शासन कर रहे हैं। उनका मानना है कि जो हालात दिख रहे हैं उनमें निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। अमेरिकी सेना ने भी हालात की गहन समीक्षा शुरू कर दी है।
ईरान में ये प्रदर्शन कई हफ्तों से जारी हैं। महंगाई, बेरोजगारी और नागरिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध मुख्य मुद्दे हैं। सरकार ने इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी है ताकि सूचना का प्रवाह रोका जा सके। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान की कार्रवाई की आलोचना की है।
रजा पहलवी की भूमिका को लेकर भविष्य की दिशा स्पष्ट नहीं है। कई विश्लेषक मानते हैं कि ईरान के भीतर उनकी सीधी पहुंच सीमित है। लेकिन विदेशों में रह रहे ईरानी समुदाय के बीच उनकी सक्रियता बढ़ी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सब ईरान की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

