ईरान-इजरायल युद्ध की आहट: क्या भारत में बंद हो जाएगी गैस की सप्लाई? जानें किसे मिलेगा पहले सिलेंडर

World News: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब आपकी रसोई तक पहुंच सकता है। ईरान और इजरायल के बीच जंग के आसार ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। अगर ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का रास्ता बंद होता है, तो देश में एलपीजी (LPG) का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में सरकार के पास एक खास ‘प्रायोरिटी लिस्ट’ होती है। इस लिस्ट के आधार पर ही तय किया जाता है कि किल्लत होने पर सबसे पहले गैस का सिलेंडर किसे दिया जाएगा और किसका कनेक्शन काटा जा सकता है।

हॉर्मुज स्ट्रेट क्यों है भारत के लिए जीवन रेखा?

दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलपीजी इसी रास्ते से गुजरती है। भारत अपनी जरूरत की 50 फीसदी से ज्यादा एलपीजी खाड़ी देशों से मंगाता है। अगर ईरान इस समुद्री रास्ते को ब्लॉक करता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह टूट जाएगी। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल दाम बढ़ेंगे, बल्कि गैस की भारी कमी भी हो सकती है। सरकार ऐसी आपातकालीन स्थिति के लिए पहले से ही तैयारी कर रही है।

संकट आने पर किसे मिलेगी प्राथमिकता?

गैस की कमी होने पर सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ऊपर रखती है। आम आदमी के घरों में चूल्हा जलता रहे, यह पहली प्राथमिकता होती है। इसके बाद रक्षा क्षेत्र और सेना की जरूरतों को पूरा किया जाता है। अस्पताल और अनिवार्य सेवाओं को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है। सरकार की कोशिश रहती है कि बुनियादी ढांचा प्रभावित न हो, ताकि जनता में अफरा-तफरी का माहौल न बने।

इन सेक्टर्स की काटी जा सकती है सप्लाई

किल्लत बढ़ने पर सबसे पहले गैर-जरूरी औद्योगिक इकाइयों (Industrial Units) की गैस काटी जाती है। जो कंपनियां एलपीजी का इस्तेमाल व्यावसायिक काम के लिए करती हैं, उन्हें वैकल्पिक ईंधन की तलाश करने को कहा जा सकता है। इसके बाद होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल कनेक्शनों पर भी पाबंदी लग सकती है। सरकार के पास ‘आपातकालीन गैस आवंटन नीति’ होती है, जो संसाधनों के सीमित होने पर सक्रिय हो जाती है।

भारत की तैयारी और बफर स्टॉक

भारत अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को मजबूत करने में लगा है। हालांकि, एलपीजी को लंबे समय तक स्टोर करना कच्चे तेल के मुकाबले थोड़ा कठिन है। सरकार अब दूसरे देशों से भी आयात के विकल्पों पर विचार कर रही है। युद्ध की स्थिति में आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। तेल मंत्रालय लगातार अंतरराष्ट्रीय हालातों पर नजर बनाए हुए है ताकि घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहे।

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