World News: नए साल का जश्न Iran में मातम और गुस्से में बदल गया है। वहां सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता हिलने लगी है। महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था से नाराज लोग सड़कों पर उतर आए हैं। यह पिछले तीन सालों का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बन गया है। इस दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कई लोगों की जान चली गई है। World News में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।
सड़कों पर ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ का शोर
प्रदर्शन की आग अब Iran के 21 प्रांतों तक फैल चुकी है। शहर ही नहीं, गांवों के लोग भी ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ (Death to Dictator) के नारे लगा रहे हैं। सरकार विरोधी रैलियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की है। नाहवंद, असदाबाद और हमादान जैसे इलाकों में भीड़ को हटाने के लिए गोलियां चलाई गईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
छात्रों पर पुलिस का कहर और मौत का आंकड़ा
रॉयटर्स के अनुसार, लोरदेगन में हुई झड़प में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। वहीं, कुहदश्त में एक सुरक्षाकर्मी भी मारा गया है। इस हिंसा में 13 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने तेहरान के शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में छापा मारा है। यहां से कई छात्राओं को गिरफ्तार किया गया है। तेहरान यूनिवर्सिटी की छात्र नेता सरीरा करीमी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
‘डरो मत, हम सब साथ हैं’ के गूंजे नारे
प्रदर्शनकारी अब 1979 की क्रांति में हटाए गए शाह के बेटे रजा पहलवी का नाम ले रहे हैं। वे राजशाही की वापसी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। भीड़ में ‘डरो मत, हम सब साथ हैं’ की आवाज गूंज रही है। लोग पिछले आंदोलनों में मारे गए साथियों को याद कर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। World News पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ इसे ईरान में बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
क्यों सड़कों पर उतरा है पूरा देश?
इस गुस्से की असली वजह पेट की भूख और गरीबी है। Iran की करेंसी रियाल रसातल में जा चुकी है। महंगाई दर 42 फीसदी के पार पहुंच गई है। आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। सुन्नी मौलाना मोलावी अब्दोलहामिद और फिल्ममेकर जाफर पनाही जैसी हस्तियों ने भी जनता का समर्थन किया है। अमेरिका समेत पश्चिमी देश भी इन हालातों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
