International News: ईरान में जारी गृहयुद्ध और हिंसक प्रदर्शनों के बीच दुनिया की सांसें अटकी हुई हैं। इन सबके बीच अब ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का नाम सुर्खियों में है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने इस समुद्री रास्ते को ब्लॉक किया, तो पूरी दुनिया में तबाही मच जाएगी। इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी घुटनों पर आ जाएगी। इसे दुनिया की सबसे खतरनाक ‘चोक पॉइंट’ माना जाता है।
दुनिया की ‘तेल वाली नस’ है ये रास्ता
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इसे दुनिया की ‘तेल वाली नस’ कहा जाता है। दुनिया भर में खपत होने वाले कुल कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे बड़े देश इसी रास्ते से अपना तेल निर्यात करते हैं। अमेरिकी आंकड़ों के मुताबिक, यहां से निकलने वाला ज्यादातर तेल भारत, चीन और जापान पहुंचता है।
ईरान का ‘ब्रह्मास्त्र’ और अमेरिका का डर
यह रास्ता ईरान के लिए किसी ‘ब्रह्मास्त्र’ से कम नहीं है। ईरान कई बार इसे बंद करने की धमकी दे चुका है। यही वजह है कि अमेरिका जैसा सुपरपावर भी ईरान पर सीधा हमला करने से डरता है। अमेरिका जानता है कि अगर ईरान ने यहां माइंस (बारूदी सुरंग) बिछा दीं, तो तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। ऐसे में जो आर्थिक संकट आएगा, उससे निपटना अमेरिका के लिए भी नामुमकिन होगा।
भारत के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति
होर्मुज में बढ़ता तनाव भारत के लिए भी खतरे की घंटी है। भारत अपनी जरूरत का 60 से 70 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। अगर यहां सप्लाई रुकती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम रातों-रात बेकाबू हो जाएंगे। इसी खतरे को भांपते हुए भारतीय नौसेना यहां ‘ऑपरेशन संकल्प’ चलाती है। इसके तहत भारतीय युद्धपोत अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा घेरा देते हैं।
सिर्फ 34 किमी चौड़ा है रास्ता
इस रास्ते की रणनीतिक अहमियत इसकी बनावट में छिपी है। इसकी कुल लंबाई 161 किलोमीटर है, लेकिन सबसे संकरे हिस्से की चौड़ाई महज 33 से 34 किलोमीटर है। इसी संकरे रास्ते से दुनिया के विशाल तेल टैंकर गुजरते हैं। किसी भी बंदरगाह की नाकेबंदी ग्लोबल सप्लाई चेन को तोड़ सकती है। हालांकि, इस रास्ते को बंद करना ईरान के लिए भी आत्मघाती होगा, क्योंकि उसका अपना व्यापार भी इसी पर टिका है। लेकिन अस्तित्व बचाने के लिए ईरान यह बड़ा दांव खेल सकता है।
