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आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा: सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर अज्ञात व्यक्ति की ठगी की साजिश!

Rajasthan News: राजस्थान पुलिस की चर्चित आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा इन दिनों एक नई मुसीबत से जूझ रही हैं। उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक फर्जी आईडी बनाई गई है। अधिकारी ने खुद अपने आधिकारिक अकाउंट से इसकी पुष्टि करते हुए आम जनता को सतर्क रहने की अपील की है।

प्रीति चंद्रा ने बताया कि इस फेक आईडी के चलते उन्हें लगातार फोन कॉल आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रोफाइल उनकी नहीं है और कोई अज्ञात व्यक्ति गलत तरीके से उनकी पहचान का इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह की घटनाएं आजकल आम हो गई हैं जहां ठग सरकारी अधिकारियों के नाम से फेक अकाउंट बनाते हैं।

इन नकली अकाउंट्स का मुख्य उद्देश्य लोगों से अनुचित लाभ लेना या पैसे की मांग करना होता है। अक्सर भोले-भाले लोग प्राधिकरण के नाम पर ठगी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में साइबर जागरूकता बेहद जरूरी है ताकि कोई भी व्यक्ति धोखे का शिकार न हो।

आईपीएस चंद्रा ने लोगों से सलाह दी है कि ऐसी किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल से बचें। उनसे कोई बातचीत या लेन-देन न करें। अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी के नाम से संपर्क करता है तो उसकी पहचान की पुष्टि जरूर कर लें। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर क्राइम सेल या स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए।

प्रीति चंद्रा का प्रेरणादायी सफर

प्रीतिचंद्रा का जन्म राजस्थान के सीकर जिले के कूदन गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता रामचंद्र सुंडा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। प्रीति की प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई और आगे की पढ़ाई जयपुर के महारानी कॉलेज से पूरी की।

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उन्होंने कभी पत्रकारिता भी की और शिक्षक की नौकरी भी की। लेकिन उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। बिना किसी कोचिंग के केवल स्वयं की कड़ी मेहनत से उन्होंने वर्ष 2008 में यूपीएससी की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली। उन्होंने इस कठिन परीक्षा में 255वीं रैंक हासिल की।

राजस्थान पुलिस में एक मजबूत छवि

आईपीएस चंद्राने अपने करियर में राजस्थान पुलिस के कई अहम पदों पर काम किया है। वह जयपुर में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त यातायात और प्रशासन रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने करौली, बूंदी और कोटा एसीबी में पुलिस अधीक्षक के तौर पर भी सेवाएं दी हैं।

जयपुर मेट्रो कॉर्पोरेशन में पुलिस उपायुक्त की भूमिका भी उन्होंने निभाई। उनकी छवि एक तेज-तर्रार और अनुशासनप्रिय अधिकारी की है। वह राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश की युवतियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

साइबर ठगी से बचाव के उपाय

सोशल मीडियापर फेक आईडी बनाना एक गंभीर साइबर अपराध है। ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ठग अक्सर प्रभावशाली व्यक्तियों की नकली प्रोफाइल बनाते हैं। फिर वे लोगों से दोस्ती करके या अधिकार का दावा करके उन्हें फंसाते हैं।

कई बार ये ठग पैसे मांगते हैं या गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। कुछ मामलों में ब्लैकमेलिंग भी देखी गई है। इसलिए ऑनलाइन हर प्रोफाइल पर विश्वास नहीं करना चाहिए। सरकारी अधिकारी आमतौर पर आधिकारिक चैनलों से ही संपर्क करते हैं।

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अगर किसी प्रोफाइल पर संदेह हो तो तुरंत रिपोर्ट कर देना चाहिए। फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट रिपोर्ट करने का विकल्प मौजूद है। साथ ही स्थानीय साइबर सेल को भी सूचित किया जा सकता है। थोड़ी सी सावधानी बड़ी ठगी से बचा सकती है।

आम जनता के लिए सलाह

प्रीतिचंद्रा के मामले ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। आम नागरिकों को ऑनलाइन सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजी गई फ्रेंड रिक्वेस्ट को तुरंत स्वीकार न करें। व्यक्तिगत जानकारी शेयर करने से पहले दो बार सोचें।

अगर कोई व्यक्ति खुद को किसी अधिकारी के रूप में पेश कर रहा है तो उसके विभाग से संपर्क करके पुष्टि कर लें। पैसे या अन्य सुविधाओं के लिए किसी भी तरह का दबाव न बनने दें। साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का भी सहारा लिया जा सकता है।

इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक व्यक्तियों के लिए भी मुश्किलें पैदा करती हैं। उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है और उनके काम में बाधा आती है। साइबर कानून के तहत ऐसे अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। फिर भी जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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