International News: तीन जनवरी 2026 की रात अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने एक गुप्त ऑपरेशन अंजाम दिया। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके बेडरूम से उठाकर अमेरिका ले आया गया। अब मादुरो न्यूयॉर्क की अदालत में नार्को-टेररिज्म के आरोपों का सामना कर रहे हैं। यह घटना अमेरिकी शक्ति का एक चौंकाने वाला प्रदर्शन बन गई है।
यह कार्रवाई दुनिया भर के नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है। वेनेजुएला इसका ताजा शिकार बना है। ऐतिहासिक रूप से अमेरिका ने कई देशों में अपने हितों के अनुरूप सरकारें स्थापित करवाने का प्रयास किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक सवाल खड़ा किया है कि भारत ऐसे दखल से कैसे सुरक्षित रहता है।
अमेरिकी डीप स्टेट का क्या है अर्थ
अमेरिकीडीप स्टेट एक विवादास्पद अवधारणा है। यह सरकार के उन गैर-निर्वाचित हिस्सों को संदर्भित करता है जो नीतियों को प्रभावित करते हैं। इसमें खुफिया एजेंसियां, नौकरशाही, सैन्य प्रतिष्ठान और बड़े कारोबारी समूह शामिल हैं। यह गठजोड़ राष्ट्रपति के बदलने से प्रभावित नहीं होता।
कई विशेषज्ञ इसे एक स्थायी प्रशासनिक तंत्र मानते हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रपति के निर्णयों पर नियंत्रण रखना होता है। अमेरिकी इतिहास में सीआईए ने कई देशों में सत्ता परिवर्तन में भूमिका निभाई है। इन हस्तक्षेपों के पीछे तेल जैसे संसाधनों या विचारधारात्मक हित शामिल रहे हैं।
वेनेजुएला में क्या हुआ था
वेनेजुएलालंबे समय से गहरे आर्थिक संकट में फंसा हुआ था। 1999 से सत्ता में रहे समाजवादी नेताओं के शासन में देश की स्थिति खराब हुई। तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था अमेरिकी प्रतिबंधों और भ्रष्टाचार से बर्बाद हो गई। महंगाई आसमान छूने लगी और जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विवाद पैदा हुआ। मादुरो ने तीसरी बार जीत का दावा किया जबकि विपक्ष ने धांधली का आरोप लगाया। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। देश में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और हजारों लोग गिरफ्तार किए गए।
अमेरिका ने किया सैन्य हस्तक्षेप
जनवरी2026 में अमेरिका ने निर्णायक कार्रवाई की। ट्रंप प्रशासन ने सीधे सैन्य ऑपरेशन का आदेश दिया। मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका कुछ समय के लिए वेनेजुएला के प्रशासन का संचालन करेगा।
विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने इसे आजादी का समय कहा। उन्होंने एदमुंदो गोंजालेज को वैध राष्ट्रपति मानने की मांग की। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने मचाडो के दावे को खारिज कर दिया। देश में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया है। नए चुनाव की मांग लगातार जारी है।
ऐतिहासिक हस्तक्षेपों की लंबी फेहरिस्त
अमेरिकाने बीसवीं सदी में कई देशों में हस्तक्षेप किया। 1953 में ईरान के लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेक को सीआईए ने हटा दिया। कारण था ब्रिटिश तेल कंपनी के राष्ट्रीयकरण का उनका फैसला। इसके बाद शाह को सत्ता में लाया गया।
1973 में चिली के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति साल्वाडोर अलेंदे को सीआईए ने हटाने में भूमिका निभाई। उनकी जगह तानाशाह पिनोशे को सत्ता सौंपी गई। पिनोशे के शासन में हजारों लोगों की हत्या हुई। यह हस्तक्षेप शीत युद्ध की विचारधारा के नाम पर किया गया।
भारत क्यों रहता है सुरक्षित
भारत एक स्वतंत्र और मजबूत लोकतंत्र है।देश की सशस्त्र सेनाएं विश्व की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत एक घोषित परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है। किसी भी परमाणु संपन्न देश के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई वैश्विक संघर्ष को जन्म दे सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था बड़ी और विविधतापूर्ण है। देश विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बना रहा है। भारत का बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए आर्थिक प्रतिबंधों का विकल्प अमेरिका के लिए भी महंगा साबित हो सकता है।
संतुलित कूटनीति है मजबूती
भारत नेहमेशा संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया है। देश न तो पूरी तरह किसी एक गठबंधन में शामिल हुआ है और न ही पूर्ण रूप से अलग+थलग रहा है। भारत अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है और साथ ही रूस का पुराना मित्र भी है।
चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका को भारत की आवश्यकता है। यह रणनीतिक आवश्यकता भारत को एक मजबूत स्थिति प्रदान करती है। शीत युद्ध के दौरान भी भारत सोवियत संघ के करीब रहा लेकिन अमेरिका ने कभी सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया।
राष्ट्रीय एकता है सबसे बड़ी ताकत
वेनेजुएलामें अमेरिकी हस्तक्षेप का एक कारण देश की आंतरिक विभाजन भी था। बड़ी संख्या में लोग मादुरो सरकार के विरोध में थे। भारत में राजनीतिक मतभेद होते हैं लेकिन बाहरी हस्तक्षेप के मुद्दे पर पूरा देश एकजुट हो जाता है। यह राष्ट्रीय एकता देश की सुरक्षा की गारंटी है।
भारत की खुफिया एजेंसियां और सुरक्षा बल सतर्क रहते हैं। पड़ोसी देशों में हुए राजनीतिक उथलपुथल के बाद भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत की है। इस तरह की सतर्कता बाहरी ताकतों के मंसूबों पर पानी फेरने का काम करती है।
