New Delhi News: भारत ने अमेरिका के नए और कड़े तेवरों पर अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। इस पर विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा है कि हम किसी के दबाव में नहीं आएंगे। भारत अपनी 140 करोड़ जनता के हितों को सबसे ऊपर रखता है। हमें जहां से भी सस्ती ऊर्जा मिलेगी, हम उसे खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यह बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ पर हमारी नजर है। भारत की ऊर्जा नीति ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है। हमारा मकसद अपने नागरिकों को सस्ता ईंधन मुहैया कराना है। हम अपनी सुरक्षा और जरूरतों से कोई समझौता नहीं कर सकते। दुनिया का कोई भी देश हमें यह नहीं बता सकता कि हम तेल कहां से खरीदें।
ट्रंप के दावों को किया खारिज
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी और राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों को भी गलत बताया है। भारत का कहना है कि ट्रेड डील पर बातचीत रुकी नहीं है। दोनों देशों के बीच 13 फरवरी 2025 से लगातार चर्चा हो रही है। हम कई बार समझौते के बेहद करीब भी पहुंचे। अमेरिकी प्रशासन का यह कहना गलत है कि भारत बातचीत में देरी कर रहा है। हम एक ऐसे समझौते के पक्ष में हैं जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच गुप्त वार्ता
द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर एक बड़ी जानकारी भी सामने आई है। साल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच 8 बार फोन पर बात हुई। इन वार्ताओं में कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। यह साबित करता है कि भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व में सीधा संवाद है। व्यापारिक खींचतान के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते मजबूत बने हुए हैं।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले चिंताजनक
भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे चरमपंथियों की एक सोची-समझी साजिश बताया है। वहां अल्पसंख्यकों के घरों और दुकानों को निशाना बनाया जा रहा है। भारत ने साफ कहा है कि अपराधियों को बचाने के बजाय उन्हें सजा मिलनी चाहिए। वहां के हालात पर हमारी पैनी नजर बनी हुई है।
चीन और पाकिस्तान को सीधी चेतावनी
पीओके की शक्सगाम घाटी में चीन के अवैध निर्माण पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। हमने साफ कर दिया है कि 1963 का चीन-पाकिस्तान समझौता पूरी तरह अवैध है। यह इलाका भारत का अभिन्न अंग है। हम अपनी संप्रभुता के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। चीन और पाकिस्तान की आर्थिक गलियारा परियोजना (CPEC) को भी भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।

