Business News: भारतीयों की आय और जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है। क्लियर टैक्स की ताजा रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार देश में उच्च आय वर्ग का दायरा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सालाना तीस लाख रुपये से अधिक कमाने वाले करदाताओं का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
साल 2024 में यह आंकड़ा 18.49 प्रतिशत था। 2025 में यह बढ़कर 23.34 प्रतिशत हो गया है। इसका मतलब है कि हर चौथा-पांचवा करदाता अब उच्च आय वर्ग में शामिल हो गया है। यह उछाल कॉर्पोरेट क्षेत्र की ताकत और पेशेवरों की बढ़ती कीमत को दर्शाता है। अब आय के स्रोत भी विविध हो गए हैं।
40 से 50 वर्ष की आयु वर्ग में सबसे ज्यादा चमक
इस आर्थिक उछाल में40 से 50 वर्ष की आयु के लोग सबसे आगे हैं। इस समूह के करीब 38 प्रतिशत लोग सालाना तीस लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं। यह वह उम्र है जब अनुभव और करियर स्थिरता चरम पर होती है। यह समूह न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रहा है बल्कि देश के टैक्स राजस्व में भी बड़ा योगदान दे रहा है।
इस आयु वर्ग की वित्तीय मजबूती एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि भारत का कार्यबल परिपक्व हो रहा है। उनके पास निवेश और बचत की बेहतर क्षमता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह समूह अर्थव्यवस्था की मांग को भी बढ़ावा दे रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट भी भारत के मध्यम वर्ग के विस्तार की बात कहती है।
बहु-आय स्रोत बने नए ट्रेंड
भारतीय अब सिर्फ वेतन पर निर्भर नहींरहे। उन्होंने आय के स्रोतों में विविधता लानी शुरू कर दी है। टैक्स फाइलिंग के ट्रेंड से यह साफ पता चलता है। आईटीआर-3 और आईटीआर-2 फाइल करने वालों की संख्या बढ़ी है। यह फॉर्म व्यवसाय और अन्य आय स्रोतों को दर्शाते हैं।
शेयर बाजार में छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। ट्रेडिंग और निवेश अब आम भारतीयों की आदत बन गई है। इससे होने वाले पूंजीगत लाभ ने कुल संपत्ति बढ़ाई है। लोग साइड बिजनेस और फ्रीलांसिंग से भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। यह वित्तीय सुरक्षा की नई संस्कृति है।
युवा पीढ़ी का निवेशक मानसिकता के साथ आगमन
नयाकार्यबल निवेशक की मानसिकता के साथ आ रहा है। पच्चीस साल से कम उम्र के युवाओं में टैक्स फाइलिंग बढ़ी है। कई पहली बार फाइल करने वालों ने पूंजीगत लाभ की सूचना दी है। यह दर्शाता है कि युवा कम उम्र में ही निवेश शुरू कर रहे हैं।
पच्चीस से पैंतीस साल के मिलेनियल्स इस बदलाव में अग्रणी हैं। सक्रिय निवेश और कई आय स्रोतों के कारण जटिल टैक्स फाइलिंग में उनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक है। क्रिप्टो संपत्तियां अभी भी एक उच्च जोखिम वाले ऐड-ऑन के रूप में बनी हुई हैं। वे मुख्यधारा के निवेश का हिस्सा नहीं बन पाई हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत की आर्थिक कहानी बदल रही है। आय बढ़ रही है और वित्तीय समझ विकसित हो रही है। यह रुझान देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। अगले कुछ वर्षों में यह प्रगति और तेज होने की उम्मीद है।
