Indian Army News: भारतीय सेना ने युद्ध के बदलते स्वरूप में एक नई शक्ति तैयार की है। इसका नाम है ‘भैरव’ बटालियन। यह नई इकाई चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनात की गई है। यह बटालियन आधुनिक हाइब्रिड युद्ध की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन की गई है।
भैरव बटालियन एक हल्की कमांडो फोर्स है। इसे स्पेशल फोर्स और पारंपरिक पैदल सेना के बीच के अंतर को पाटने के लिए बनाया गया है। इसमें करीब 250 चुनिंदा सैनिक शामिल हैं। ये सैनिक इन्फैंट्री, आर्टिलरी और एयर डिफेंस जैसे विभिन्न कोर से आते हैं।
भैरव बटालियन की खास विशेषताएं
इस बटालियन को बहु-क्षेत्रीय संचालन में सक्षम बनाया गया है। सैनिक आधुनिक हथियारों से लैस हैं। इनके पास एके-203 असॉल्ट राइफल्स और लंबी दूरी के स्नाइपर हैं। साथ ही रॉकेट लॉन्चर जैसे भारी हथियार भी मौजूद हैं।
बटालियन का प्रतीक चिन्ह भी खास है। इसमें ‘अदृश्य और अदम्य’ शब्द लिखे हैं। साथ में एक कोबरा सांप की आकृति बनी है। यह प्रतीक दुश्मन के लिए खतरे का संकेत देता है। बटालियन का नाम भगवान शिव के रौद्र रूप ‘भैरव’ पर रखा गया है।
नए युद्ध के लिए नई रणनीति
आधुनिक युद्ध सिर्फ राइफल और टैंक तक सीमित नहीं रहा। अब ड्रोन, साइबर हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध महत्वपूर्ण हैं। भैरव बटालियन इन सभी नई चुनौतियों के लिए तैयार है। सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
प्रशिक्षण में तकनीकी कौशल पर विशेष जोर दिया गया। सैनिक ड्रोन ऑपरेशन और साइबर सुरक्षा में निपुण बनाए गए। उन्हें लंबी अवधि के संचालन के लिए भी तैयार किया गया। मानसिक और शारीरिक दृढ़ता पर खास ध्यान दिया गया।
विशेष बलों के साथ अंतर
भारतीय सेना में पहले से ही विशेष बल मौजूद हैं। फिर भैरव बटालियन की आवश्यकता क्यों पड़ी? सेना के अधिकारी इसका स्पष्टीकरण देते हैं। विशेष बल रणनीतिक संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
भैरव बटालियन रणनीतिक और सामरिक संचालन के बीच का सेतु है। यह छोटे और त्वरित अभियानों को अंजाम दे सकती है। यह उच्च जोखिम वाले मिशनों के लिए भी सक्षम है। इसकी तैनाती विशेष रूप से पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर की गई है।
अलग-अलग इलाकों के लिए तैयारी
इस बटालियन को विभिन्न भूभागों में काम करने के लिए तैयार किया गया है। लद्दाख के ऊंचे पहाड़ी इलाके अलग चुनौती देते हैं। जम्मू-कश्मीर के जंगल और रेगिस्तानी इलाके अलग मांग रखते हैं।
भैरव बटालियन की टुकड़ियों को इन सभी परिस्थितियों के अनुकूल बनाया गया है। प्रत्येक यूनिट को विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इससे उनकी कार्यक्षमता और प्रभावशीलता बढ़ गई है। यह लचीलापन आधुनिक युद्ध में बहुत जरूरी है।
पांच महीने की कठिन तैयारी
इस बटालियन को केवल पांच महीने पहले ही तैयार किया गया है। इस छोटी अवधि में ही सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें विस्फोटक निपटान और आपातकालीन चिकित्सा जैसे कौशल भी सिखाए गए।
संचार व्यवस्था और डिजिटल युद्ध पर भी प्रशिक्षण दिया गया। यह बटालियन सेना के भीतर नवाचार का प्रतीक बन गई है। यह पारंपरिक सैन्य शक्ति में आधुनिक तकनीक का मेल है। इससे भारत की सीमा सुरक्षा और मजबूत होने की उम्मीद है।
भविष्य की भूमिका और तत्परता
भैरव बटालियन के कमांडिंग अधिकारी ने अपनी तत्परता स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि बटालियन किसी भी संचालन के लिए तैयार है। सीमा के भीतर या बाहर दोनों तरह के मिशन पूरे किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दुश्मन पर हमला होने पर यह बटालियन काल बनकर टूटेगी। सैनिकों के नाम सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। फिलहाल इसे उत्तरी और पश्चिमी सीमा पर तैनात किया गया है। सेना इस नई ताकत से बड़ी उम्मीदें रखती है।

