Sports News: भारतीय क्रिकेट टीम ने राजकोट के दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड से सात विकेट से हारकर तीन मैचों की सीरीज 1-1 की बराबरी पर छोड़ दी। केएल राहुल के शानदार शतक के बावजूद टीम 285 रन ही बना सकी। न्यूजीलैंड ने डेरिल मिशेल के अविजित 131 रनों की मदद से आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत की खराब क्षेत्ररक्षण और ऑलराउंडरों का निराशाजनक प्रदर्शन हार की मुख्य वजह रहा।
टीम प्रबंधन का ऑलराउंडरों पर अतिरिक्त भरोसा इस मैच में भारी पड़ गया। रवींद्र जडेजा और नीतीश रेड्डी जैसे खिलाड़ियों से बल्ले और गेंद दोनों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। दोनों ही अपनी भूमिका में विफल रहे। इससे टीम की संतुलन की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
राहुल का शतक और मध्यक्रम का पतन
भारत की पारी का एकमात्र चमकदार पक्ष केएल राहुल का नाबाद 112 रनों का पुल था। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में टीम को मुकाबले में बनाए रखा। उनके इस प्रयास ने उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक लगाने वाले पहले भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज बना दिया। कप्तान शुभमन गिल ने भी 56 रनों की अच्छी शुरुआत की।
लेकिन मध्यक्रम एक बार फिर विफल रहा। विराट कोहली, श्रेयस अय्यर और सूर्यकुमार यादव सस्ते में आउट हो गए। इस वजह से राहुल को अंत तक साथ देने वाला कोई बल्लेबाज नहीं मिला। टीम एक बार फिर फिनिशर की कमी से जूझती नजर आई।
मिशेल के कैच का भारी पड़ना
न्यूजीलैंड की पारी में डेरिल मिशेल का कैच टपकाना भारत के लिए निर्णायक साबित हुआ। जब मिशेल 82 रन पर थे, तो प्रसिद्ध कृष्णा ने उनका आसान सा कैच गिरा दिया। इसके बाद मिशेल ने भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने नाबाद 131 रन बनाए और टीम को जीत दिलाई।
विल यंग ने भी 87 रनों की उपयोगी पारी खेली। दोनों ने मिलकर तीसरे विकेट के लिए 162 रनों की साझेदारी की। इस जोड़ी ने भारतीय गेंदबाजों पर पूरे मैच में दबाव बनाए रखा। भारतीय क्षेत्ररक्षण में भी कई चूक हुईं।
ऑलराउंडरों का निराशाजनक प्रदर्शन
रवींद्र जडेजा और नीतीश रेड्डी का प्रदर्शन चिंता का विषय बना हुआ है। जडेजा ने बल्ले से 44 गेंदों में केवल 27 रन बनाए। गेंदबाजी में भी वह बेअसर रहे। पिछले पांच वनडे मैचों में उनके नाम केवल एक विकेट है। यह आंकड़ा उनकी गेंदबाजी की स्थिति को दर्शाता है।
नीतीश रेड्डी को वॉशिंगटन सुंदर के विकल्प के रूप में मौका दिया गया। उन्होंने केवल दो ओवर गेंदबाजी की और बल्ले से 21 गेंदों में 20 रन बनाए। यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। टीम चयनकर्ताओं के समक्ष एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में कमजोरी
भारतीय गेंदबाज धीमी पिच पर भी सटीक लाइन और लेंथ बनाए रखने में विफल रहे। उमरान मलिक और शार्दुल ठाकुर महंगे साबित हुए। कुलदीप यादव ने एक विकेट लिया लेकिन उनके ओवरों में भी दो कैच टपके। यह टीम की सामूहिक असफलता थी।
केवल मोहम्मद सिराज ही कुछ हद तक आर्थिक रहे। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय स्पिनरों के खिलाफ रिवर्स स्वीप और स्लीप शॉट खेलकर आसानी से रन बटोरे। भारतीय कप्तान को गेंदबाजी बदलने और क्षेत्ररक्षण सेट करने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा।
इस हार के बाद तीसरे और अंतिम वनडे का महत्व काफी बढ़ गया है। दोनों टीमें हैदराबाद में खेले जाने वाले निर्णायक मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगी। भारतीय टीम प्रबंधन को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने की जरूरत है। खिलाड़ियों के चयन को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
