भारत चीन के सीमा विवाद से चीन को इस साल अच्छा खासा झटका लगा है। भारत सरकार की योजना अच्छी खासी कामयाब रही है। कोरोना महामारी के बीच चीन से आयात में 13 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है वही निर्यात में 16 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है।

भारत ने चीन को लगभग 1.40 लाख करोड़ का निर्यात किया है और यह आंकड़ा महज 11 महीनों में हासिल किया गया है। यह आंकड़े चीन के सीमा शुल्क विभाग की ओर से जारी किए गए है। इस साल जनवरी से नवंबर तक 11 महीनों में भारत ने चीन को 1.40 लाख करोड़ का निर्यात किया है और यह आंकड़ा 16 फीसदी ज्यादा है। इस दौरान भारत ने चीन से 4.36 लाख करोड़ का आयात भी किया है।

भारत चीन सीमा विवाद के कारण आम लोगों द्वारा चीन के सामान के बहिष्कार से आयात में यह कमी दर्ज की गई है। पिछले साल चीन से आयात में 16.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों की माने तो भारत चीन सीमा विवाद के बाद भारत के लोगों ने बड़े स्तर पर चीनी उत्पादों का बहिष्कार किया है। इसके चलते भारत के कारोबारियों ने चीन से आयात में भारी कटौती की है।

अगर हम ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट की माने तो उनका कहना है कि महामारी के कारण भारत की आंतरिक मांग में गिरावट आई है। इसका असर चीन से निर्यात पर पड़ा है।  

बीजिंग में भारतीय दूतावास ने इन आंकड़ों को संग्रह किया है। इसके मुताबिक, 2019 में भारत चीनी कार्बनिक रसायन, उवर्रक, एंटीबायोटिक्स और एल्युमीनियम फ्वॉयल के लिए सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य था। वहीं, चीन कार्बनिक रसायन, लौह अयस्क, कच्चे हीरे, मछली, कपास और ग्रेनाइट पत्थर का शीर्ष आयातक था। 

दरअसल, 2019 के दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा एक दशक में पहली बार कम हुआ। इस दौरान 2005 के बाद व्यापार घाटा 2 फीसदी कम होकर 56.95 अरब डॉलर रहा था। पिछले साल भारत और चीन के बीच 92.89 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था। इस दौरान अमेरिका, जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, ताइवान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, मलयेशिया, ब्राजील और रूस के बाद भारत चीन का 12वां सबसे बड़ा कारोबारी भागीदार था। 

 इस बीच, चीनी मीडिया ने भारत से चावल खरीद के फैसला का सावधानीपूर्वक स्वागत किया है। चीन ने तीन दशक में पहली बार भारत से बड़े पैमाने पर चावल का आयात करना शुरू किया है। इस बीच, भारतीय कारोबारियों ने दिसंबर-फरवरी के बीच चीन को 300 डॉलर प्रति टन के हिसाब से एक लाख टन टूटे चावल के निर्यात का अनुबंध किया है।

दरअसल, थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार और पाकिस्तान से चीन चावल खरीदता है। लेकिन, आपूर्ति में गिरावट के कारण चीन को 10 गुना ज्यादा कीमत पर भारत से आयात करना पड़ रहा है। भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है, जबकि चीन सबसे बड़ा आयातक। पड़ोसी देश सालाना करीब 40 लाख टन चावल खरीदता है।

error: Content is protected !!