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दावोस में भारत का डंका! ऑक्सफैम ने दुनिया को दिखाया आईना, आरक्षण व्यवस्था की जमकर तारीफ

Davos News: स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 56वीं बैठक शुरू हो गई है। बैठक के पहले ही दिन भारत के लिए एक अच्छी खबर आई है। मानवाधिकार समूह ‘ऑक्सफैम इंटरनेशनल’ ने अपनी वार्षिक असमानता रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत की आरक्षण प्रणाली की जमकर तारीफ की गई है। संस्था ने इसे आम लोगों को राजनीतिक रूप से ताकतवर बनाने का एक बेहतरीन उदाहरण बताया है। ऑक्सफैम का मानना है कि भारत की यह नीति हाशिए पर पड़े लोगों को मुख्यधारा में ला रही है।

अरबपतियों की संपत्ति में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक आम नागरिक की तुलना में अरबपति के राजनीतिक पद पर बैठने की संभावना चार हजार गुना ज्यादा है। साल 2025 में अरबपतियों की संपत्ति पिछले पांच सालों के औसत से तीन गुना तेजी से बढ़ी है। यह अब 18.3 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम 1,660 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा होती है।

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भारत की आरक्षण नीति को बताया गेमचेंजर

ऑक्सफैम ने राजनीतिक सशक्तिकरण पर भारत का उदाहरण दुनिया के सामने रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए राजनीतिक आरक्षण (कोटा) की व्यवस्था है। यह आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों को संसद और विधानसभाओं तक पहुंचाता है। यह सिस्टम नीति निर्माण में वंचितों की भागीदारी सुनिश्चित करता है। संस्था ने इसे प्रगति का एक ठोस और सफल उदाहरण माना है।

महिलाओं और पिछड़ों को मिला हक

रिपोर्ट में भारत में महिलाओं के लिए घोषित 33 प्रतिशत आरक्षण का भी जिक्र किया गया है। भारत अपनी जनसंख्या के अनुपात में वंचित वर्गों को विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देता है। राजनीति के अलावा, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में भी कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण है। ऑक्सफैम का कहना है कि जमीनी आंदोलन और नागरिक संगठन राज्यों के स्वाभाविक सहयोगी होते हैं। ये संगठन दबे-कुचले समुदायों की आवाज को सरकार तक पहुंचाते हैं।

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क्या काम करती है ऑक्सफैम संस्था?

ऑक्सफैम गैर-सरकारी संगठनों (NGO) का एक वैश्विक संघ है। यह संस्था दुनिया भर में गरीबी, असमानता और अन्याय से लड़ने का काम करती है। इसकी शुरुआत साल 1942 में ‘ऑक्सफोर्ड कमेटी फॉर फेमाइन रिलीफ’ के रूप में हुई थी। बाद में 1995 में ऑक्सफैम इंटरनेशनल का गठन हुआ। यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और जलवायु न्याय जैसे मुद्दों पर काम करती है। इनका मुख्य लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है, जहां हर व्यक्ति सम्मान के साथ जी सके।

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