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पीएमओ अधिकारी का दावा: व्यापार युद्ध के बीच भारत ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर

Business News: प्रधानमंत्री कार्यालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि भारत एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने यह बात शुक्रवार को एक व्याख्यान में कही। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और सुधारों के कारण देश के पक्ष में माहौल बना है। यह बयान वैश्विक व्यापार शुल्क के बढ़ते तनाव के बीच आया है।

शक्तिकांत दास ने पहला विवेक देवराय स्मृति व्याख्यान दिया। उन्होंने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का जिक्र किया। उनका कहना था कि वैश्वीकरण को गति देने वाली आम सहमति अब कमजोर पड़ गई है। बहुपक्षीय सहयोग हासिल करना पहले से कठिन हो गया है। इस पृष्ठभूमि में भारत ने आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी है।

आत्मनिर्भरता का मतलब अलगाव नहीं

दास ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब अलग-थलग पड़ना नहीं है। यह एक रणनीतिक दृष्टिकोण है। इसका उद्देश्य मूलभूत क्षमता और लचीलापन विकसित करना है। आर्थिक आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण वस्तुओं के घरेलू उत्पादन से आती है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता जरूरी है।

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उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य विदेशी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है। यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का तरीका है। आत्मनिर्भरता की यह अवधारणा दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेगी। यह वैश्विक झटकों के प्रति देश के प्रतिरोध को बढ़ाएगी।

चुनौतियों के बावजूद अनुकूल परिस्थितियां

पीएमओ के इस शीर्ष अधिकारी ने माना कि चुनौतियां आती रहेंगी। ये चुनौतियां ज्ञात और अज्ञात दोनों स्रोतों से आ सकती हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां भारत के पक्ष में हैं। सरकार के सुधारों और नीतिगत फैसलों ने इस माहौल को बनाया है। यह देश के लिए एक अवसर का समय है।

शक्तिकांत दास भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्ननर भी रह चुके हैं। उनके पास आर्थिक मामलों का व्यापक अनुभव है। उनका यह विश्लेषण वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर है। व्यापार युद्ध और संरक्षणवादी नीतियों के इस दौर में उनके विचार महत्वपूर्ण हैं।

उनके अनुसार भारत अब एक ऐतिहासिक यात्रा शुरू करने जा रहा है। देश ने इस यात्रा की दहलीज पर कदम रख दिया है। सही नीतियों और समर्पित प्रयासों से यह यात्रा सफल हो सकती है। इससे भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ रहे हैं। कई देश व्यापार शुल्क बढ़ा रहे हैं। आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आम बात हो गई है। ऐसे में आत्मनिर्भरता की रणनीति और भी प्रासंगिक हो जाती है। यह देश की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। निर्माण और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में इसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति मिल रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में यह रणनीति समझदारी भरी है। यह देश को बाहरी झटकों से बचाने में मदद करेगी। साथ ही यह दीर्घकालिक आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। आत्मनिर्भरता और वैश्विक एकीकरण के बीच संतुलन जरूरी है।

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