हाथ काटने वाला ये निहंग सिखों की इतनी क्रुरता क्यों? जानिए- कहां से है कनेक्शन, क्या है इतिहास; सिंघु हत्याकांड में हुई है गिरफ्तारी

सिंघु बॉर्डर पर निहंग सिख हाल के दिनों में फिर से तब चर्चा में आए जब उन पर एक युवक को हाथ-पैर काटकर टांग देने का आरोप लगा है। बॉडी को पुलिस बैरिकेडिंग से लटकाया गया था। सुबह में जब प्रदर्शन स्थल पर युवक की खून से लथपथ लाश मिली तो सनसनी फैल गई। निहंग के अनुसार उन्होंने युवक की हत्या इसलिए की थी, क्योंकि उसने पवित्र धर्म ग्रंथ का अपमान किया था। मृतक युवक निहंग सिखों के घोड़ों की देखभाल करता था। रविवार को सिंघु बॉर्डर घटना मामले में पुलिस ने दो और निहंगों (माला पहने हुए) को हिरासत में लिया है।

ऐसा ही एक और मामला अप्रैल 2021 में भी सामने आया था जब 21 वर्षीय एक युवक पर कथित तौर से एक सिख ने हमला कर दिया था। इस हमले में कुंडली के रहने वाले युवक को अपनी बाईं बांह और नौकरी गंवानी पड़ी थी। इसी तरह 15 अक्टूबर को सिंघु बॉर्डर पर एक अन्य व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इस मामले में हत्या के मुख्य आरोपी निहंग सिख सरबजीत ने सरेंडर कर दिया था। इसके अलावा अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने मामले के दूसरे आरोपी नारायण सिंह को पंजाब के अमरकोट गांव राख देवीदास पुरा से गिरफ़्तार कर लिया गया है।

इन सभी घटना ने निहंग सिखों को एक बार फिर सुर्खियों में ला खड़ा किया है। आइए, जानते हैं कि आखिर निहंग सिख कौन होते हैं और इतिहास क्या है?

निहंग सिखों का इतिहास

दरअसल, निहंग फारसी का शब्द है, जिसका अर्थ मगरमच्छ, कमल और तलवार होता है, लेकिन इनकी विशेषता संस्कृत के शब्द निशंक से ज्यादा मिलती जुलती मालूम पड़ती है जिसका अर्थ निडर और शुद्ध होता है। जानकारी के मुताबिक, सिखों के सबसे आक्रामक तबके को ये नाम मुगलों ने दिया था। इसके पीछे मान्यता ये मानी जाती है कि जिस तरह से पानी में मगरमच्छ को हराना मुश्किल होता है, ठीक उसी तरह युद्ध में निहंगों को मात देना आसान काम नहीं है।

निहंग सिखों को ऐसा लड़ाका बनाने का श्रेय सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह को जाता है। गुरु गोविंद सिंह के चार बेटे थे। अजित सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह। फतेह सिंह सबसे छोटे बेटे थे। माना जाता है कि एक बार तीनों बड़े भाई आपस में युद्ध का अभ्यास कर रहे थे। इसी दौरान फतेह सिंह भी वहां पहुंचे और युद्ध कला सीखने की इच्छा जताई. इस पर बड़े भाइयों ने उनसे कहा कि अभी आप छोटे हैं और जब बड़े हो जाओगे तब ये सीख लेना।

कहा जाता है कि अपने तीनों बड़े भाइयों की इस बात पर फतेह सिंह नाराज हो गए। वो घर के अंदर गए और नीले रंग का लिबास पहना, सिर पर एक बड़ी सी पगड़ी बांधी और हाथों में तलवार और भाला लेकर पहुंच गए। उन्होंने अपने भाइयों से कहा कि अब वो लंबाई में तीनों के बराबर हो गए हैं। गुरु गोविंद सिंह ये सब देख रहे थे। फेतह सिंह की बहादुरी से वो प्रभावित हुए और तब जाकर चारों भाइयों को उन्होंने युद्ध कला सिखाई। मान्यता है कि फतेह सिंह ने अपने बड़े भाइयों की बराबरी करने के लिए जो चोला पहना था, वहीं आज के निहंग सिख पहनते हैं। फतेह सिंह ने जो हथियार उठाया था, आज भी निहंग सिख उसी हथियार के साथ दिखते हैं।

अतीत में निहंग सिखों ने अपने धर्म को बचाने के लिए कई लड़ाइयां लड़ी हैं और अपना बलिदान दिया है, लेकिन उनकी यही बहादुरी उन्हें ‘कट्टर’ भी बनाती है जिसका वजह से विवादों से उनका नाता रहता है। निहंग सिखों पर सबसे बड़ा आरोप लॉकडाउन के दौरान अप्रैल 2020 में लगा था। आरोप लगा कि उन्होंने एक पुलिसकर्मी का हाथ काट दिया था। इसके बाद कई निहंग सिखों की गिरफ्तारी हुई थी।

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