वैक्सीनेशन रजिस्ट्रेशन क्या सरकार की नाकामी को छुपाना है- राम भगत नेगी

दुनियां का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत देश जहां तो विश्व गुरु बनने का सपना देख रहा था जिसे साकार करने के लिए भारत के प्रधान मंत्री विश्व के कई देशों में भ्रमण कर गये। कई तकनीकी सीख कर वे भारत आये ।और भारत को शिखर तक ले जाने में दिन रात एक करते रहें। हर संघर्ष से वे लड़ते रहे। हर वक्त विरोधियों के निशाने में वे बने रहे, लेकिन फिर भी टस से मस ना होते हुए मोदी सरकार एक से एक फैसले करते रहे कई फैसलें उनके देश हित के लिए रहे ।

लेकिन जैसे ही कोरोना काल आया देश में इस महामारी से
लाखों लोग जब बेरोजगार हो गये। तो मोदी सरकार के सभी काम विफल दिखे एक साल कोरोना को हो गये सरकार की मेडिकल तैयारिया विफल रही। समय रहते ना कोई इलाज ना ऑक्सिन ना दवाई ना डॉक्टर ना वेंटिलेटर। सरकार सिर्फ चुनाव के सता में व्यस्त रही ऐसे में देश में मोदी सरकार को सता का लालच दिखा। जिस उम्मीद से देश ने उन्हें एक और मौका दिया लेकिन सरकार यहां अब विफल दिख रही है। वैक्सीनेशन त्यौहार सरकार का पानी में मिल गया।

जहां सरकार वैक्सीनेशन को एक बड़ा इवेंट बनाने का प्रयास कर रही थी वही अब वैक्सीन की मात्रा कम होने से इसकी समय सीमा बदल गये जहां सरकार ने 60की उम्र और फ्रंट वॉरियर को लगाने के बाद 45 उम्र वालो से ऊपर की बारी आई तो उनका एक डोज लगते ही समय सीमा ज्यादा कर दी। लेकिन फिर सरकार ने 18 साल से ऊपर का वैक्सीनेशन शुरू किया जिसमे पोर्टल के द्वारा रजिस्ट्रेशन करना है।
ये तकनीक देख कर कभी तो ऐसा लगता है सरकार वैक्सीन की कमी को छुपा रही है इस लिए रजिस्ट्रेशन की तकनीकी अपनाई है।

सरकार होती तो सयानी है इस तकनीकी से सरकार को कोई नुकसान नहीं, क्योंकि पोर्टल समय सीमा पर खुलेगा। जिसे जनकारी हो पुनः रजिस्ट्रेशन करेगा यह प्रक्रिया दो बार करनी है। एक बार रजिस्ट्रेशन से आपको वैक्सीन नहीं मिलती, एक समय तो वो गया । और दूसरा तब जब आप इसे सही समय पर रजिस्ट्रेशन करें। बहुत ही सावधानी से सरकार ने अपनी नाकामी को छुपाया है अगर देश में भरपूर मात्रा में वैक्सीन होता तो सरकार को इतना स्वांग करने कि आवश्यकता क्या थी ।

चलिए जल्द वैक्सीन से भारत भर जाऐ समय सीमा में वैक्सीनेशन प्रक्रिया को पूरा करें यही उम्मीद सरकार से है। दूसरी लहर आनी थी और तीसरी भी लेकिन सरकार कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाई जो लोग लोन लेकर कारोबार कर रहें है उनका ब्याज लगा है। टैक्सी, प्राइवेट बस, ट्रक, ऑटो आदि चलने वालों को सोचो इन्हें इन्शोरेंस करना होता है, किस्त भरना होता है, कहीं कोई व्यवस्था नहीं है, लोगों को खाने के लाले हो गए। सरकार कहती है घर में रहो सुरक्षित हैं, कैसे घर में सुरक्षित है क्या खा कर गुजारा करें?

लोग बीमारी से कम डिप्रेशन में ज्यादा हो गये सरकार ऐसे लोगों को खोजे जिनका बैंको में कर्जा है जो व्यवसाय कर अपना गुजारा कर रहा है। इस कोरोना में मध्यम और गरीब ज्यादा पीस रहा है कृपा उनका सहयोग करें कोरोना काल के इस व्यवस्था से सरकार को जल्द ही लोगों की आर्थिक स्थित को ठीक करना होगा। वरना कई मौतें अभी भूख मरी से होने वाली है। मेरा सरकार से कोई निजी दुश्मनी नहीं लेकिन देश हित के मेरा लिखना ये कलम चुप भी नहीं रह सकता।

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