ट्रम्प पर चलेगा महाअभियोग; निचले सदन में प्रस्ताव पारित

सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में बुधवार को हुई ऐतिहासिक वोटिंग में महाभियोग प्रस्ताव पास हो गया है। अब उन्हें सत्ता से हटाने के लिए उच्च सदन सेनेट में महाभियोग की प्रक्रिया चलेगी। विपक्षी डेमोक्रैट्स के बहुमत वाले हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में महाभियोग के पक्ष में 230 और विरोध में 197 वोट पड़े। इस तरह अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप देश के इतिहास के तीसरे ऐसे राष्ट्रपति बन चुके हैं जिन पर महाभियोग होगा।

ट्रंप पर यह है आरोप
ट्रंप पर आरोप हैं कि उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में संभावित प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन समेत अपने घरेलू प्रतिद्वंद्वियों की छवि खराब करने के लिए यूक्रेन से गैरकानूनी रूप से मदद मांगी।

हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में महाभियोग को लेकर डेमोक्रेट्स का कहना है कि उनके पास इसके अलावा ‘कोई विकल्प ही नहीं’ था। उनका कहना है कि यह ट्रंप के रेकॉर्ड पर एक कभी न मिटने वाला धब्बा है। वोटिंग से पहले डेमोक्रैट सांसद ऐडम स्किफ ने कहा, ‘यहां आइडिया ऑफ अमेरिका ही खतरे में है।’

वाइट हाउस ने बयान जारी कर कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप को पूरा भरोसा है कि वह पूरी तरह से दोषमुक्त साबित होंगे। वाइट हाउस ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी लोगों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के लिए वैसे ही बिना थके काम करते रहेंगे, जैसे कामकाज संभालने के पहले दिन से करते आए हैं।’

वाइट हाउस ने आगे कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति को पूरा भरोसा है कि सेनेट सही व्यवस्था, निष्पक्षता और जरूरी प्रक्रियाओं को फिर से स्थापित करेगा, जिन्हें हाउस की कार्यवाही में नजरअंदाज किया गया था। वह अगले कदम के लिए तैयार हैं और पूरी तरह आश्वस्त हैं कि वह पूर्ण रूप से दोषमुक्त साबित होंगे।’

ट्रंप को अब संसद के उच्च सदन सेनेट में महाभियोग की प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा जहां उनकी पार्टी रिपब्लिकन का मजबूत बहुमत है। ऐसे में उम्मीद कम ही है कि सेनेट में महाभियोग प्रस्ताव पास हो। बता दें कि 4 महीने पहले एक विसलब्लोअर ने ट्रंप पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के लिए यूक्रेन पर दबाव का आरोप लगाया था।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ट्रंप की सत्ता भी फिलहाल सुरक्षित रहेगी क्योंकि महाभियोग की प्रक्रिया निचले सदन में पूरी भी होने के बाद भी रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट से उसका पास होना मुश्किल है। ट्रंप एक ही सूरत में हट सकते हैं, जब कम से कम 20 रिपब्लिकन सांसद उनके खिलाफ विद्रोह का झंडा उठा लें। फिलहाल इसकी गुंजाइश कम ही है। कहा यह जा रहा है कि महाभियोग का प्रस्ताव रिपब्लिकन्स को एकजुट कर देगा।

आपको बता दें कि डॉनल्ड ट्रंप से पहले अमेरिका के दो और राष्ट्रपतियों के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही हुई है। 1868 में ऐंड्यू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन दोनों ही नेता अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे थे। इसके अलावा रिचर्ड निक्सन ने महाभियोग से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

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