सीमा पर चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 16 हजार गांव में बनेगी टू इन वन ह्यूमन इंटेलिजेंस

अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगते इलाकों पर दुश्मन की नजर न पड़े और वहां होने वाली तमाम गतिविधियों की खबर समय पर मिलती रहे, इसके लिए ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ की नई टीम खड़ी की जाएगी।

यह टीम ‘टू इन वन’ का काम करेगी। एक, दुश्मन पर लगातार नजर रखेगी और दूसरा, सीमावर्ती इलाकों में चल रही विकास योजनाओं में सहभागी बनेगी। खास बात है कि ये सारा काम केंद्र या राज्य सरकार की कोई ‘खुफिया’ एजेंसी नहीं करेगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में स्थित 16 हजार गांव के लोग यह जिम्मेदारी संभालेंगे। लखनऊ में 20-21 नवंबर को आयोजित 56वें पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक सम्मेलन में इस अहम मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पुलिस महानिदेशकों का एक कोर ग्रुप गठित किया गया था। इस ग्रुप की रिपोर्ट में उक्त चर्चा हुई है। ये रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सहित दूसरे बलों एवं इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ साझा की जाएगी।

चीन को लेकर केंद्र पर लगते रहे हैं गंभीर आरोप

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मेलन में शिरकत की थी। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों तथा सीएपीएफ व सीपीओ के 62 महानिदेशक/महानिरीक्षक शामिल हुए थे। वरिष्ठता के आधार पर आईबी के 400 से अधिक अधिकारियों ने देशभर में मौजूद सूचना ब्यूरो कार्यालयों से वर्चुअल तौर पर इसमें भाग लिया था। इस दौरान साइबर अपराध, नारकोटिक्स, जेल सुधार, आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद, सीमावर्ती गांवों का विकास, एनजीओ को विदेशी फंडिंग व ड्रोन से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा के लिए पुलिस महानिदेशकों के अनेक कोर ग्रुप गठित किए गए थे। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए एक विशेष रिपोर्ट तैयार की गई है। पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी ने चीन को लेकर केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए थे। पार्टी नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने चीन के भारतीय सीमा में छह-सात किलोमीटर अंदर आने की बात कही है। इससे पहले अरुणाचल सीमा पर चीन के सौ घरों वाले गांव और भूटान की सीमा में चीन की दस्तक जैसे आरोप भी लगते रहे हैं।

पुलिस महानिदेशकों ने सीमावर्ती इलाकों के लिए दिए सुझाव

सीमावर्ती इलाकों में बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं, जहां नियमित गश्त संभव नहीं हो पाती है। हालांकि सेना व दूसरे सुरक्षा बलों द्वारा वहां पर सर्विलांस उपकरणों की मदद से नजर रखने का दावा किया जाता रहा है। ऐसे इलाकों में ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ की नई टीम खड़ी करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए केंद्र या राज्य सरकारों को अतिरिक्त खर्च नहीं करना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए पहले से ही एक तय राशि प्रदान की जाती है। अब उसी राशि में बढ़ोतरी कर ‘टू इन वन’ टीम का गठन किया जाएगा। इस टीम में अंतरराष्ट्रीय सीमा ‘आईबी’/ नियंत्रण रेखा ‘एलओसी’ व वास्तविक नियंत्रण रेखा ‘एलएसी’ से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के लोग शामिल होंगे। ऐसे गांवों की संख्या करीब 16 हजार है। यहां के विकास के लिए केंद्र सरकार, राज्यों के साथ मिलकर ‘सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ चलाती है। अब इन्हीं गांव में ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ इकाई गठित होंगी। ग्रामीण लोगों को सुरक्षा बलों में होने वाली भर्तियों में प्राथमिकता मिलेगी। वहां पर जितनी भी विकास योजनाएं शुरू होंगी, उनमें गांव वालों की भागीदारी रहेगी।

साल 2017-18 के दौरान जारी हुई राशि

16 राज्यों में 119 सीमावर्ती जिलों का होगा विकास

केंद्र सरकार द्वारा 16 राज्यों में 119 ऐसे जिलों का चयन किया गया है, जिनकी सीमा अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से लगती है। इनमें अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग, संघ राज्य क्षेत्र मानकर ‘सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ का बजट जारी किया जाता है। योजना में अब दो हजार से अधिक नए गांव शामिल किए गए हैं। साल 2019 से पहले बॉर्डर के 10 किलोमीटर दायरे में आने वाले गांवों की संख्या करीब 14000 थी। पिछले कुछ वर्षों से सीमावर्ती गांवों को ‘आदर्श गांव’ का दर्जा दिया जाने लगा है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों के निकट स्थित पड़ोसी गांवों के समूह से घिरे किसी बड़ी जनसंख्या वाले गांव के विकास में सहायता मिलती है। 2016-17 के दौरान आदर्श गांव के विकास के लिए सात राज्यों को निधियां जारी की गई थीं। इनमें हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड व राजस्थान शामिल हैं। इन राज्यों के 40 आदर्श गांवों को 90.32 करोड़ रुपये मिले थे। अगले वित्त वर्ष में अरुणाचल प्रदेश के 18 आदर्श गांवों व मणिपुर के 3 आदर्श गांवों को 35.70 करोड़ रुपये प्रदान किए गए थे।

‘क्रो-फ्लाई/एरियल डिस्टेंस’ में बढ़ेगा बीएडीपी फंड

केंद्र सरकार द्वारा नई योजना के तहत बॉर्डर से दस किलोमीटर की दूरी के भीतर ‘क्रो-फ्लाई/एरियल डिस्टेंस’ वाले 119 जिलों में जो 16000 गांव स्थित हैं, वहां ‘बीएडीपी’ कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बजट बढ़ाया जा सकता है। 2018-19 से 2020-21 के दौरान बीएडीपी के तहत इन जिलों को 1659.18 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसके दुरुपयोग की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अब इस राशि में वृद्धि कर गांवों का विकास किया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा करने के लिए ‘सीमा अवसंरचना और प्रबंधन’ पर भी खास जोर दिया जा रहा है।

सीमावर्ती इलाकों में सड़कें और बीओपी सीमा चौकियां, कंटीली तार व रोशनी के लिए गत छह वर्षों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 5916.52 करोड़ रुपये, भारत-भूटान सीमा पर 116.47 करोड़ रुपये, भारत-म्यांमार सीमा पर 102.76 करोड़ रुपये व भारत-चीन सीमा के लिए 1908.83 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। बॉर्डर पर मानवीय इंटेलिजेंस जुटाने के लिए ‘क्रो-फ्लाई/एरियल डिस्टेंस’ वाले इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा लोगों को विकास योजनाओं से जोड़ने के लिए जल्द ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ होगा।

सीमा अवसंरचना और प्रबंधन पर खर्च हुई इतनी राशि

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