दो दो बार शिलान्यास, फिर भी घोषणापत्र तक ही सीमित रहा करसोग का मिनी सचिवालय

हिमाचल की पुरानी और नई सरकारों ने आज तक भले ही विकास के दावे कर लोगों से वोट मांगती हो, लेकिन धरातल पर विकास कहाँ है, यह एक गंभीर प्रश्न है। लोग आधारभूत सुविधाओं के लिए भी तरसते रहते है और नेता चुनाव जीतते ही अपने आप में मगन हो जाते है। ऐसा ही उदाहरण मंडी के करसोग से सामने आया है। जहां आम जनता को दो-दो सरकारें एक मिनी सचिवालय का लॉलीपॉप एक नही दो-दो बार दे चुकी है। पहले एक मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया, सरकार बदली तो दूसरे मुख्यमंत्री को स्थान पसंद नही आया और दूसरी जगह शिलान्यास कर दिया। लेकिन करसोग की जनता आज भी सचिवालय से वंचित है।

करसोग उपमंडल मुख्यालय में बनने वाले मिनी सचिवालय का निर्माण लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में स्थानीय लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बताते चले कि करसोग में सभी जरूरी विभाग के कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर हैं और मिनी सचिवालय वनने के बाद यह सभी कार्यालय एक ही छ्त के नीचे आ जाएंगे। एक छत के नीचे सभी सरकारी कार्यालय न होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालत यह है कि दूर दराज श्रेत्रो से आए लोगों को अपने कार्यों के लिए अलग अलग जगहों पर भटकना पड़ता है।

बताते चलें कि उपमंडल करसोग में मिनी सचिवालय का शिलान्यास 2015 को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तहसील परिसर करसोग के साथ लगते कृषि विभाग करसोग के नजदीक में किया था तथा दुसरी बार फिर से इस भवन का शिलान्यास पुराना बाजार मे किया गया, जो कि अभी सिर्फ कागजों में सिमटा हुआ है। मिनी सचिवालय बनने से जनता के अधिकतर कार्य एक छत के नीचे निपटने की उम्मीद जगी थी। लेकिन बिडंवना यह है कि कुछ वर्ष का लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद मिनी सचिवालय का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। गौर रहे कि मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए भूमि का भी प्रावधान किया गया था। लेकिन मिनी सचिवालय के लिए भूमि होने से बावजूद भी मामला लटक गया। यानी राजनीतिक खिंचातान के चलते मिनी सचिवालय का अभी तक निर्माण नहीं हो पाया। मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए क्षेत्र के लोगों को अभी तक और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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