महाराष्ट्र में परिवहन सेवा ठप्प, कर्मचारियों ने बंद किए 250 डिपो, 376 कर्मी निलंबित

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के राज्य सरकार में विलय की मांग को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल जारी है। इसके चलते राज्य परिवहन सेवा पूरी तरह से ठप हो गई है। कर्मचारियों के विरोध के कारण बुधवार को महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम एमएसआरटीसी) के सभी 250 डिपो पर बस परिचालन बंद कर दिया गया है।

वहीं MSRTC के हड़ताली कर्मचारी आज मुंबई में एक मोर्चा निकालने की योजना बना रहे हैं। संघ के एक नेता के मुताबिक, महाराष्ट्र भर से सरकारी निगम के कई कर्मचारी निजी वाहनों से शहर के लिए रवाना हुए हैं। हालांकि, पुलिस उन्हें रास्ते में ही रोक सकती है। मार्च को देखेते हुए पुलिस व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है।

सभी 250 डिपो बंद

एमएसआरटीसी के एक अधिकारी ने कहा, “आज राज्य भर में सभी 250 डिपो बंद हैं। कल, कम से कम तीन डिपो चालू थे, लेकिन वे भी आज बंद हैं।” MSRTC के कर्मचारियों का एक वर्ग 28 अक्टूबर से ड्यूटी पर नहीं आ रहा है। कर्मचारी नकदी-संकट वाले निगम का राज्य सरकार के साथ विलय की मांग कर रहे हैं। बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन पर नाराजगी व्यक्त की और राज्य सरकार ने कर्मचारियों से अपनी ड्यूटी फिर से शुरू करने की अपील की, लेकिन उन्होंने हिलने से इनकार कर दिया।

यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

एमएसआरटीसी की बसें सड़कों पर न चलने के कारण लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय आरटीओ) के अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार ने यात्रियों को ले जाने के लिए निजी बसों और माल वाहनों की अनुमति दी है, लेकिन ये मौजूदा कमी को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हैं।

सरकार ने बुलाई मीटिंग

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री अनिल परब, जो एमएसआरटीसी के अध्यक्ष भी हैं, ने हड़ताल के मुद्दे पर निगम के श्रमिक संघों की कार्य समिति के साथ दिन में एक बैठक बुलाई है। इस बीच, भाजपा एमएलसी प्रवीण दरेकर और सदाभाऊ खोत ने पूर्वी उपनगरों के मानखुर्द में एक प्रदर्शन किया, जिसमें मांग की गई कि राज्य भर से यहां आने वाले एमएसआरटीसी कर्मचारियों को उनके विरोध के लिए दक्षिण मुंबई पहुंचने की अनुमति दी जाए।

376 कर्मचारी हुए निलंबित

एमएसआरटीसी ने मंगलवार को राज्य के 45 डिपो के 376 कर्मचारियों को हड़ताल में कथित रूप से भाग लेने और भड़काने के आरोप में निलंबित कर दिया था। कर्मचारियों को निलंबित करने का कदम तब आया जब उच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा पूर्ण सहयोग देने और उनकी विलय की मांग को पूरा करने के लिए एक पैनल गठित करने के बावजूद अपना आंदोलन वापस नहीं लेने के उनके “अड़े हुए रुख” की निंदा की।

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