मियाद पूरी कर चुके वाहनों पर कसा शिकंजा: स्क्रैप में हर महीने तब्दील हो रहे है 1000 से अधिक पुराने वाहन

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर शिकंजा कसने के लिए परिवहन विभाग की मुहिम का असर दिखने लगा है। मियाद खत्म होने वाले वाहनों को जब्त करने से उनकी तादाद में धीरे धीरे कमी के साथ स्क्रैप का कारोबार भी बढ़ने लगा है।

10 साल पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने हो चुके पेट्रोल वाहनों की मियाद खत्म होने के बाद भी सड़कों से उतरने वाले वाहनों को जब्त कर स्क्रैप के लिए भेजा जा रहा है। पिछले एक महीने में अभियान के तहत करीब 800 वाहनों पर कार्रवाई से स्क्रैप कारोबार में बढ़ोतरी होने लगी है।

तीन साल नई पॉलिसी के बाद पुराने वाहनों पर शिकंजा कसने लगा। दिल्ली में इसके लिए आठ कंपनियों को वाहनों को स्क्रैप करने के लिए चुना गया। इन कंपनियों में औसतन हर माह 1000 से अधिक वाहन स्क्रैप करने के लिए भेजे जा रहे हैं।

अगर कबाड़ बन चुके वाहनों पर सख्ती इसी तरह जारी रही तो दिल्ली में ऐसे वाहनों से वायु प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है। परिवहन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक वाहनों पर परिवहन विभाग, ट्रैफिक और डीपीसीसी की तरफ से कार्रवाई की जा रही है।

15 लाख से अधिक वाहनों की खत्म हो चुकी है मियाद दिल्ली में अब तक एक करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहन हैं। इनमें से 15 लाख से अधिक वाहनों की मियाद पूरी हो चुकी है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पुराने वाहनों के सड़कों पर उतरते ही उनपर कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद जल्द ही मियाद खत्म होने चुके उन वाहनों को भी जब्त किया जाएगा, जिन्हें हटाया नहीं गया है।

इससे प्रदूषण में काफी कमी आएगी और वाहनों की भीड़भाड़ भी कम होगी। इनमें से लाखों की संख्या में अनाधिकृत स्क्रैप दुकानों को बेची जा चुकी हैं। नियमों को सख्ती से लागू करने के बाद अधिकृत एजेंसियों के पास ही इन्हें स्क्रैप किया जा रहा है।

हर महीने घटेगा 1000 वाहनों का बोझ
स्क्रैप एजेंसियों के मुताबिक तीन साल पहले पॉलिसी के आने के बाद पुराने वाहनों पर कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ। दो साल के दौरान कोरोना काल में कार्रवाई न के बराबर रही, इसलिए वाहनों का कबाड़ में कोई खास कमी नहीं आई। फिलहाल औसतन एक स्क्रैप एजेंसी के पास रोजाना 5-10 वाहन पहुंच रहे हैं।

इन वाहनों को स्क्रैप करने के बाद इससे कुछ जरूरी धातुओं को रिसाइक्लिंग के लिए भेज दिया जाता है। स्क्रैप वाहनों का सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है ताकि वाहन मालिक कभी भी जरूरत पड़े तो इसका इस्तेमाल कर सकें। हर महीने औसतन 5-10 वाहनों को स्क्रैप किया जा रहा है तो हर माह 1000 से अधिक कबाड़ बन चुके वाहनों की संख्या कम होगी।

कबाड़ दोपहिया के बदले मिलते हैं दो-ढाई हजार रुपये एक स्क्रैप एजेंसी के मैनेजर भारत कौशिक ने बताया कि रोजाना 6-10 वाहनों को स्क्रैप किया जा रहा है। इनमें 80 फीसदी दोपहिया हैं जबकि शेष 20 फीसदी कारें हैं। फिलहाल सड़कों पर चलने वाले वाहनों को जब्त किया जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में सख्ती बढ़ेगी।

स्क्रैप में वाहनों की संख्या बढ़कर पांच से छह गुना अधिक हो गई हैं। इन्हें स्क्रैप करने के बाद वाहन मालिक को 18 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर दिया जाता है। दोपहिया वाहनों के स्क्रैप की कीमत 2000-2500 रुपये तक होती है।

मेटल्स का दोबारा होता है इस्तेमाल
स्क्रैप एजेंसी के यश अरोड़ा ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में स्क्रैप के कारोबार में पांच गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। पिछले दो वर्षों तक काम नगण्य था। वाहनों को स्क्रैप करने के बाद इससे जरूरी मेटल्स को दोबारा उपयोग के लिए बेच दिया जाता है।

इसके बदले वाहन मालिकों को भुगतान किया जाता है। कारों की कीमत 25 से 35 हजार रुपये तक दी जा रही है। वाहनों को सर्टिफिकेट जारी किया जाता है ताकि वाहन मालिकों को इसका लाभ मिल सके। नए वाहनों की खरीद पर भी इसका फायदा मिलता है।

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