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आजादी के 75 साल बाद भी नही हटा गुलामी का यह प्रतीक, हाई कोर्ट में गुलामी का प्रतीक हटाने की मांग के साथ याचिका दायर

दिल्ली (Delhi) हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भारतीय विमानों में पहचान के लिए लिखे VT कोड को बदलने की मांग की गई है. बीजेपी नेता और वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय ने दिल्ली हाई कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है.

अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में भारतीय विमानों (Indians Planes) पर रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ VT साइन को हटाने का केंद्र सरकार को आदेश देने की मांग कोर्ट से की है. याचिका में दावा करते हुए कहा गया है कि 1929 में ब्रिटेन ने सभी उपनिवेशों के लिए VT साइन को निर्धारित किया था, लेकिन आजादी मिलने के बाद भारत एक संप्रभु राष्ट्र है. न कि वायसरॉय टेरेटरी.

अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में कहा है कि विमानों पर लिखे VT का मतलब विक्टोरियन टेरिटरी या वायसराय टेरिटरी के रूप में माना जाता है, जिसे अंग्रेजों की विरासत के रूप में देखा जाता है. यह कोड विक्टोरियन टेरिटरी और वायसराय टेरिटरी (ब्रिटिश राज की विरासत) से संबंधित है. चीन, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका जैसे देशों ने आजादी मिलने के बाद अपने कॉल साइन्स कोड को बदल दिया. जबकि भारत में 93 साल बाद भी विमान पर यही कोड बना हुआ है, यह कोड संप्रभुता, कानून के शासन (अनुच्छेद 14), स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19) और गरिमा का अधिकार (अनुच्छेद 21) के उलट है.

भारत में अब तक VT कोड क्यों जारी?

अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में कोर्ट से पूछा है कि भारत में अब तक VT कोड क्यों जारी है? पंजीकरण कोड बदलने की सरकार की कोशिशें बेनतीजा रही हैं. 2004 में, उड्डयन मंत्रालय ने कोड बदलने के लिए अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) से संपर्क किया था लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत ने आजादी के 75 साल बाद भी गुलामी के प्रतीक VT को बरकरार रखा है, जोकि देश के लिए शर्मनाक है.

75 साल बाद भी विमानों से नहीं बदला गुलामी का प्रतीक’

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट में याचिका दायर कर भारतीय विमानों पर लिखे VT कोड को बदलने की मांग की है. उनका कहना है कि देश को आजाद हुए 75 साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अब तक विमानों से अंग्रेजों की गुलामी के प्रतीक VT कोड को नहीं बदला गया है. इसीलिए कोर्ट केंद्र सरकार को इस कोड को बदलने का आदेश दे.

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