गरीबी और लाचारी ने व्हीलचेयर पर बिठाया, अब भारत की इस बेटी ने पैरालिंपिक में मेडल पक्का कराया

भारत की भाविना पटेल ने पैरालिंपिक खेलों में महिला टेबल टेनिस एकल क्लास 4 के सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही देश के लिए पदक सुनिश्चित कर लिया। अहमदाबाद की 34 वर्षीय भाविना ने 2016 रियो पैरालिंपिक की स्वर्ण पदक विजेता सर्बिया की बोरिसलावा पेरिच रांकोविच को सीधे गेमों में 3-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

टेटे में पदक लाने वाली पहली खिलाड़ी

भाविना ने 19 मिनट तक चले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में रांकोविच को 11-5,11-6, 11-7 से हराया। भाविना पहली भारतीय महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने पैरालिंपिक खेलों के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। सेमीफाइनल में भाविना का सामना शनिवार को चीन की झांग मिआ से होगा।

एक वक्त वर्ल्ड नंबर दो थी रैंकिंग

34 वर्षीय भाविना की मौजूदा वर्ल्ड रैंकिंग 12 है। व्हीलचेयर पर मनोरंजन के लिए टेबल टेनिस खेलना शुरू करने वाली भाविना की वर्ल्ड रैंकिंग एक वक्त नंबर दो थी। 2011 पीटीटी थाईलैंड टेबल टेनिस चैंपियनशिप जीतने के बाद उन्होंने यह कमाल किया था। अक्टूबर 2013 में बिजिंग एशियन पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं के सिंगल क्लास 4 इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था।

क्लास 4 कैटेगरी की खिलाड़ी

भाविना ने 2017 में बीजिंग में फिर से एशियाई पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में कमाल किया। इस बार मेडल का रंग ब्रॉन्ज था। वह क्लास 4 की श्रेणी की पैरा एथलीट हैं। यानी इन खिलाड़ियों का हाथ पूरी तरह सुरक्षित होता है, उनकी दुर्बलता रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में चोट या सेरेब्रल पाल्सी के कारण हो सकती है।

गरीबी और लापरवाही ने व्हीलचेयर पर बिठाया

6 नवंबर 1986 में गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर के एक छोटे से गांव में जन्मीं भाविना सिर्फ 12 माह की थीं तब उनके साथ एक हादसा हुआ। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वालीं भाविना पोलिया ग्रसित हो गईं। पांच लोगों के परिवार में इकलौते कमाने वाले पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि इलाज करवा पाए। बाद में विशाखापट्टनम में सर्जरी जरूर हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला क्योंकि लापरवाह भावना ने अपने रिहैब में ध्यान नहीं दिया।

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